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हाथरस केस में नया मोड़: फॉरेंसिक साइस लैब में नहीं हुई दुष्कर्म की पुष्टि

समग्र समाचार सेवा

लखनऊ, 1 अक्टूबर।
अब हाथरस केस ने नया मोड़ ले लिया है क्योंकि फॉरेंसिक साइस लैब की रिपोर्ट में नए खुलासे हो रहे है। जी हां फॉरेंसिक साइस लैब की रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि में नहीं हुई है। रिपोर्ट के अनुसार हाथरस के बूलगढ़ी गांव की गुड़िया की मौत का कारण 14 सितंबर को उसके साथ हुई बर्बरतापूर्वक मारपीट है।  उसके साथ दुष्कर्म या सामूहिक दुष्कर्म नहीं हुआ था।

हाथरस की पीड़िता की दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज चला जहां पर उसकी मौत हुई थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़िता की गर्दन पर चोट के निशान हैं और रीढ़ की हड्डियां भी टूटी हुई हैं। पीड़िता को ब्लड इन्फेक्शन और हार्ट अटैक भी आया था। रिपोर्ट के मुताबिक. मौत का वक्त 29 सितंबर सुबह 6 बज कर 55 मिनट बताया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के एडीजी कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार ने बताया कि हाथरस मामले में फोरेंसिक रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई है। हमको पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद इसी रिपोर्ट का इंतजार था। एडीजी प्रशांत कुमार ने कहा कि आगरा की लैब से मिली रिपोर्ट में युवती में शुक्राणु नहीं पाया गया है। कुछ लोगों ने प्रदेश में जातीय तनाव पैदा करने के मकसद से इस केस को गलत तरीके से पेश करने का प्रयास किया है। इस प्रकरण में पुलिस ने शुरू से ही त्वरित तथा तत्समय कार्रवाई करके माहौल बिगड़ने से बचाया।

प्रशांत कुमार ने कहा कि अब हम विधिक कार्रवाई के तहत ऐसे लोगों की पहचान में लगे हैं, जिन्होंने प्रदेश के सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने के साथ ही जातीय हिंसा को फैलाने का प्रयास किया है। जवाबदेह प्रशासन की बिना अनुमति के बिना काम करके हाथरस को दंगे की आग में झोंकना चाहते थे। ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तय है। प्रशांत कुमार ने कहा कि मामले को अनावश्यक तूल देकर माहौल खराब करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है 14 सितंबर को हाथरस के चंदपा थाना क्षेत्र के एक गांव में 19 वर्षीय लड़की के साथ क्रूरता की गई। इसके बाद पहले उसे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया और सोमवार को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में शिफ्ट किया गया, जहां पर उसने मंगलवार को दम तोड़ दिया

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