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टीआरपी छेड़छाड़ मसले से मचे घमासान के बीच BARC के नए फैसले से टीवी समाचार जगत में ख़ुशी व गम

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली,15 अक्टूबर|

भारत के टेलीविजन समाचार जगत में टी आर पी ( टेलीविजन रेटिंग्स पॉइंट्स) को लेकर एक नया घमासान व विवाद शुरू हो गया है. .इस व्यापारिक जगत के आपसी लड़ाई में दर्शक वर्ग बेचारा बन गया हैं| ये विवादित मामला कोर्ट भी पहुँच गया है .जहाँ मामला विचाराधीन है|

इसी क्रम में टीआरपी से छेड़छाड़ के मामले को लेकर मचे घमासान के बीच टीवी रेटिंग्‍स जारी करने वाली संस्‍था ‘ब्रॉडकास्‍ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) ने एक बड़ा फैसला लिया है। दरअसल इस संस्था ने 12 महीने के लिए रेटिंग्‍स न जारी करने का फैसला किया है। यानी अब यह संस्था तीन महीने तक साप्‍ताहिक रेटिंग्‍स जारी नहीं करेगी।

वहीं, मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके दावा किया था कि टीआरपी रेटिंग् को लेकर घोटाला हो रहा था। कुछ चैनल कोशिश कर रहे थे कि वो किसी तरह से टीआरपी को अपनी तरफ खींच लें, लेकिन अब BARC ने फैसला लिया है कि अगले तीन महीनों तक टीआरपी जारी नहीं की जाएगी। इस क्रम में इंडिया टुडे समूह और रिपब्लिक टी वी नेटवर्क का भी नाम भी चर्चा में आया था |

मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने बताया था कि देशभर में अलग-अलग जगहों पर 30 हजार रेटिंग मीटर लगाए गए हैं। मुंबई में इन मीटरों को लगाने का काम हंसा नाम की संस्था ने किया था। मुंबई पुलिस का दावा है कि हंसा के कुछ पुराने वर्करों ने जिन घरों में पीपल्स रेटिंग्स मीटर लगे थे, उनमें से कई घरों में जाकर वे लोगों से कहते थे कि आप 24 घंटे अपना टीवी चालू रखिए और फलां चैनल लगाकर रखिए। इसके लिए वे लोगों को पैसे भी देते थे। मुंबई पुलिस का दावा है कि अनपढ़ लोगों के घरों में भी अंग्रेजी के चैनल को चालू करवाकर रखा जाता था।इसके अन्य पक्ष पर भी अनुसन्धान जारी हैं |

बता दें कि ब्रॉडकॉस्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) टेलीविजन रेटिंग बताने वाली दुनिया की सबसे बड़ी संस्था है, जिसका गठन 2014 में किया गया था। टैम के साथ किए गए संयुक्त उपक्रम के बाद, यह भारत के टी वी प्रसारण सेक्टर में एक मात्र टेलीविजन मापिकरन निकाय है, जिसका मुख्यालय मुंबई में है।

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