Samagra Bharat News website

उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र एवं लोक संस्कृति विकास संस्थान, प्रयागराज के तत्वाधान में 16 संस्कार का सात दिवसीय कार्यशाला आयोजित

समग्र समाचार सेवा
प्रयागराज,5 नवम्बर।

अइले हो वशिष्ठ मुनी राज भवन में, पाँव पखारन जाई।

राजा दशरथ के चारों ललन के, नाव रखावल जाई।।

उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र एवं लोक संस्कृति विकास संस्थान, प्रयागराज के तत्वाधान में 16 संस्कार का सात दिवसीय कार्यशाला के तीसरे दिन नामकरण संस्कार प्रतिभागियों को सिखाया गया।
प्रशिक्षक एवं निर्देशक के रूप में लोक कलाविद, उत्तर प्रदेश संस्कृति अकादमी से पुरस्कृत उदय चन्द्र परदेशी को चुनकर यह जिम्मेदारी सौंपी गयी है।

 

 

 

कार्यशाला में उपस्थित लोक संस्कृति विकास संस्थान के अध्यक्ष शरद कुमार मिश्र ने कहा कि सोलह संस्कारों के बारे में समाज को अवगत कराने एवं उन अवसरों पर गाये जाने वाले लोकगीतों के संरक्षण हेतु संस्थान द्वारा यह कार्यशाला उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज के मार्गदर्शन एवं सहयोग से आयोजित की जा रही है जिसमें आधुनिकता के अंधेरे में विलुप्त हो चुके सोलह संस्कार गीतों को प्रतिभागी सीखेंगे और इसे समाज के कोने कोने तक पहुंचाने में केंद्र का और संस्थान का सहयोग करेंगे।
केंद्र निदेशक इंद्रजीत ग्रोवर ने सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।


कार्यशाला में कुल 40 प्रतिभागियों का प्रवेश लिया गया है।
आज तीसरे दिन नामकरण संस्कार में अइले हो वशिष्ठ मुनी राज भवन में, पाँव पखारन जाई।
राजा दशरथ के चारों ललन के, नाव रखावल जाई।। और अन्न प्रासन संस्कार में ‘मामा जी चटइहैं खीर ललना के गीत सिखाया।

Exit mobile version