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महाभारत और रामायण में भी मौजुद है छठ पूजा का उल्लेख, जानिए इसके पीछे की पौराणिक कथाएं

Chhath Mahaparv Special- Why Chhath is celebrated, its mythological significance

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 17नवंबर।
दिवाली के बाद छठ पूजा का त्योहार मनाया जाता है. इस साल छठ पूजा का त्योहार 20 नवंबर 2020 को मनाया जाएगा. हिंदू पंचांग के अनुसाक छठ पूजा कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है. इस पर्व की शुरूआत नहाय-खाय से हो जाती है, जो कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को होता है. बिहार के लोगों का यह सबसे बड़ा त्योहार होता है. ऐसे में आज हम आपको छठ पूजा के बारे में बताने जा रहे हैं कि कैसे इस पर्व को मनाने की शुरुआत हुई थी।
महाभारत में है इसका उल्लेख
नहाय-खाय से शुरू होने वाले छठ पर्व के बारे में कहा जाता है कि इसकी शुरूआत महाभारत काल से ही हो गई थी. एक कथा के मुताबिक महाभारत काल में जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गए थे तब द्रौपदी ने इस चार दिनों के व्रत को किया था।

बता दें कि दानवीर कर्ण ने इस त्योहार पर सूर्य की उपासना की थी और मनोकामना में अपना राजपाट वापस मांगा था. इसके साथ ही एक और मान्यता प्रचलित है कि इस छठ पर्व की शुरूआत महाभारत काल में कर्ण ने की थी.

रामायण में भी है उल्लेख
एक कथा के मुताबिक, मां सीता ने छठ पूजा की थी. पौराणिक कथाओं के अनुसार 14 वर्ष वनवास के बाद जब भगवान राम अयोध्या लौटे थे तो रावण वध के पाप से मुक्त होने के लिए ऋषि-मुनियों के आदेश पर राजसूय यज्ञ करने का फैसला लिया. इसके लिए मुग्दल ऋषि को आमंत्रण दिया गया था, लेकिन मुग्दल ऋषि ने भगवान राम एवं सीता को अपने ही आश्रम में आने का आदेश दिया.

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