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मोदी सरकार ने 320 करोड़ की 28 खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को दी मंजूरी, 10 हजार लोगों को मिलेगा लाभ

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली,22नवंबर।
सरकार ने 320.33 करोड़ रूपए की परियोजना लागत के साथ 28 खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को मंजूरी दी है। दस राज्यों में स्वीकृत इन परियोजनाओं से 10 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलेगा। इनमें पूर्वोत्तर भारत की छह परियोजनाएं भी शामिल हैं। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की अध्यक्षता में शनिवार को हुई एक बैठक में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को मंजूरी दी गई। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रामेश्वर तेली भी बैठक में उपस्थित थे। परियोजनाओं के प्रमोटरों ने भी वीडियो कांफ्रेंस से भाग लिया। खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत तीन मई 2017 को खाद्य प्रसंस्‍करण एवं परिरक्षण क्षमता सृजन/ विस्‍तार योजना को अनुमोदित किया गया था। इस योजना का मुख्य उद्देश्‍य प्रसंस्‍करण एवं संरक्षण क्षमताओं का निर्माण और मौजूदा खाद्य प्रसंस्‍करण इकाइयों का आधुनिकीकरण/विस्‍तार करना है, जिससे प्रसंस्‍करण के स्‍तर में वृद्धि होगी, मूल्‍यवर्धन होगा तथा अनाज की बर्बादी में कमी आएगी।

अंतर-मंत्रालयी अनुमोदन समिति ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तराखंड, असम और मणिपुर में 320.33 करोड़ रुपए की कुल परियोजना लागत के साथ 28 खाद्य प्रसंस्करण यूनिटों को मंजूरी दी, जिसमें 107.42 करोड़ रू. की अनुदान सहायता भी शामिल है। ये परियोजनाएं 212.91 करोड़ रुपए के निजी निवेश से क्रियान्वित होगी, जिनमें लगभग 10,500 व्यक्तियों को रोजगार मिल सकेगा। इसके साथ ही इनकी खाद्य प्रसंस्करण क्षमता 1,237 टन प्रति दिन होगी। इन परियोजनाओं में यूनिट स्कीम के तहत 48.87 करोड़ रू. की कुल लागत एवं 20.35 करोड़ रुपए के अनुदान वाली छह परियोजनाएं भी शामिल हैं जो पूर्वोत्तर भारत में खाद्य प्रसंस्करण के विकास में सहायक सिद्ध होगी। साथ ही वहां के लोगों के लिए प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार का सृजन करेगी।

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