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कार्तिक पूर्णिमा के दिन लगने वाला है साल का आखिरी चंद्र ग्रहण, यहां जानें सूतक काल और समय

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 27नवंबर।
हिंदू धर्म में पूर्णिमा का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है. प्रत्येक वर्ष 12 पूर्णिमाएं होती हैं. जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 13 हो जाती है. कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है. इस पुर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा की संज्ञा इसलिए दी गई है क्योंकि आज के दिन ही भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक महाभयानक असुर का अंत किया था और वे त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए थे. ऐसी मान्यता है कि इस दिन कृतिका में शिव शंकर के दर्शन करने से सात जन्म तक व्यक्ति ज्ञानी और धनवान होता है. इस दिन चन्द्र जब आकाश में उदित हो रहा हो उस समय शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा इन छ: कृतिकाओं का पूजन करने से शिव जी की प्रसन्नता प्राप्त होती है।

इस दिन गंगा नदी में स्नान करने से भी पूरे वर्ष स्नान करने का फाल मिलता है. इस दिन देव दीपावली भी है. साथ ही इसी दिन साल 2020 का आखिरी चंद्रग्रहण भी लगने वाला है. इस बार कार्तिक पूर्णिमा दो तरह से बहुत महत्वपूर्ण है. कार्तिक पूर्णिमा पर एक तरफ जहां चंद्रग्रहण लग रहा है, वहीं दो शुभ संयोग इस पूर्णिमा को बन रहे हैं।
पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण का समय-
29 नवंबर की दोपहर 12 बजकर 47 मिनट पर
30 नवंबर की दोपहर 2 बजकर 59 मिनट पर
ग्रहण प्रारंभ 30 नवंबर की दोपहर 1 बजकर 4 मिनट पर
ग्रहण मध्यकाल 30 नवंबर की दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर
ग्रहण समाप्त 30 नवंबर की शाम 5 बजकर 22 मिनट पर

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