Site icon Samagra Bharat News website

सावधानः ऑनलाइन लीक हुआ 70 लाख भारतीयों का Credit-Debit कार्ड का डेटा, PAN से लेकर इनकम तक की है जानकारी

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 11 दिसंबर

भारतीय साइबर​ सिक्योरिटी रिसर्चर, राजशेखर राजाहरिया ने दावा किया है कि 70 लाख से अधिक भारतीय डेबिट व क्रेडिट कार्ड से जुड़ी प्राइवेट डेटा ऑनलाइन लीक हुई है। राजाहरिया को यह जानकारी डार्क वेब फोरम के जरिए मिली है, जहां इन डेटा को संभावित ग्राहकों को बेचा जा सकता है। सुरक्षा के लिहाज से देखें तो इन डेबिट और क्रेडिट कार्ड से जुड़ी प्राइवेट जानकारी का इस्तेमाल कई तरह की गलत साइबर एक्टिविटी के लिए किया जा सकता है।

मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार लीक हुए कुल डेटा की साइज 1.30 GB है। राहत की बात यह है कि लीक हुए डेटा में ऐसी कोई जानकारी नहीं है, जिसकी मदद से कोई फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन हो सकेगा।

बता दें कि लीक डेटा में भारतीय कार्डधारकों के केवल नाम ही नहीं बल्कि उनके मोबाइल नंबर्स, इनकम लेवल्स, इमेल आइडी और पर्मानेंट अकाउंट नवंबर (PAN) डिटेल्स आदि शामिल हैं। यह गूगल ड्राइव लिंक के माध्यम से डाउनलोड के उपलब्ध है। यह लिंक पब्लिक एक्सेस के लिए ओपन हैं।

साइबरसिक्योरिटी रिसर्चर राजशेखर राजाहरिया ने इस महीने की शुरुआत में डार्क वेब पर गूगल ड्राइव लिंक की खोज़ की थी, जिसे “Credit Card Holders data” के नाम का टाइटल दिया गया था।

मीडिया के साथ साझा किए लिंक में 59 एक्सल फाइल्स शामिल हैं, जिसमें कार्डधारकों के पूरे नाम, मोबाइल नंबर, शहर, इनकम लेवल और इमेल आइडी आदि शामिल हैं। इसके अलावा इसमें पैन कार्ड नंबर, इम्पलॉय डिटेल्स आदि शामिल हैं। हालांकि, लीक डेटा में बैंक अकाउंट और पीड़ित के कार्ड नंबर आदि की जानकारी शामिल नहीं है।

राजाहरिया ने को बताया उन्होंने एक्सल शीट में लिस्ट कुछ नाम को लिंकडिन व ट्रूकॉलर पर उनके नाम की आइडी से भी वेरिफाई किया है। यहां तक कि उन्होंने खुद के नाम की भी इस लिस्ट में ढूंढ निकाला है। हालांकि, इस डेटा में उन बैंकों का कोई स्पष्ट विवरण नहीं है जिनके कार्डधारकों की जानकारी इस में लीक हुई हैं, इसमें ज्यादातर कार्डधारकों के लिए फर्स्ट स्वाइप अमाउंट शामिल है।

राजाहरिया का कहना है कि यह डेटा किसी थर्ड पार्टी से संबंधित हो सकता है, जो बैंक को सेवा प्रदान करता है या उसे लीड करता है। यह जानकारी सबसे पहले Inc42 द्वारा सार्वजनिक की गई थी। यह डेटा कब लीक किया गया है, इसकी सटिक जानकारी फिलहाल साफ नहीं है। हालांकि, इसमें संभवत साल 2010 से लेकर 2019 के बीच की जानकारी शामिल हो सकती है।

Exit mobile version