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बिहार में कोरोना जांच में भी हुआ घोटाला, सीएम नीतीश कुमार ने कहा- फर्जीवाड़ा करने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा

The Nitish government has formed 12 teams to investigate and has said that those who commit fraud will not be left out.

समग्र समाचार सेवा
पटना, 13फरवरी।
जब कोरोना महामारी से पूरा देश लड़ रहा था और इससे निजात पाने की कोशिश कर रहा था तब कुछ लोगों से इसका फायदा उठाया और देश को लुटने का काम किया। जी हां ऐसा ही एक मामला कोरोना वायरस के टेस्ट में फर्जीवाड़े के रूप में सामने आया है, जिसे बड़ा घोटाला बताया जा रहा है। मामला बिहार का है। नीतीश सरकार ने जाँच के लिए 12 टीमें गठित की हैं और कहा है कि फर्जीवाड़ा करने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा। बता दें कि इस मामलें को लेकर सियासत भी तेज़ हो गई है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए बिहार में इसे बड़ा घोटाला बताया है।

बिहार में कोरोना जांच फर्जीवाड़े का मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि इसकी जांच कराई जा रही है. इसमें जो भी लोग दोषी होंगे उन्हें बख्शा नहीं जाएगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव ने बताया कि 22 जिलों की जानकारी ली गई है, एक जिले में कुछ गड़बड़ी आई है, जिसपर तत्काल कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने कहा कि राज्यसभा में भी इससे संबंधित प्रश्न उठाया गया था, शुक्रवार को ही केंद्रीय स्वास्थ मंत्री और स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव को जानकारी भेज दी गई है।

इधर, विपक्ष इसे लेकर सरकार को घेरने में जुटी है. बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने अपने अधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर लिखा कि अरबों का कोरोना घोटाला सामने आने के बाद नीतीश जी दिखावटी तौर पर जैसा कि पूर्व के 61 घोटालों में करते आए है छोटे स्तर के कर्मचारियों को बर्खास्त करने का नाटक रच, धन उगाही कर जदयू को चुनावी चंदा देने वाले उच्च अधिकारियों को बचायेंगे. यही नीतीश कुमार की स्थापित नीति, नीयत और नियम है।

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा, “बिहार में टेस्टिंग की संख्या 4 महीनों तक देश में सबसे कम रही. विपक्ष और जनदबाव में नीतीश जी ने विपदा के बीच ही आंकड़ों की बाजीगरी नहीं करने वाले 3 स्वास्थ्य सचिवों को हटा दिया. फिर उन्होंने अपने जांचे-परखे आंकड़ों की बाजीगिरी करने वाले भ्रष्ट अधिकारियों को नियुक्त किया.” उन्होंने कहा कि उसके बाद अगले 3 दिनों में ही टेस्टिंग की संख्या दुगनी हो गई और लगभग 15 दिनों में यह संख्या एक लाख और 25 दिनों में दो लाख तक पहुंच गई।

उन्होंने आगे कहा, “उसी स्वास्थ्य संरचना से मात्र एक महीने से भी कम समय में यह प्रतिदिन जांच का अांकड़ा इतना गुणा कैसे बढ़ गया? सारा माजरा आंकड़ों के अमृत मंथन का है.” तेजस्वी के इस ट्वीट के बाद सत्ता पक्ष ने तजेस्वी पर पलटवार किया है. बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय कहते हैं कि जांच प्रारंभ कर दी गई है, जो भी दोषी होंगे कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि कोरोना जांच में फर्जीवाड़ा मामलें में जमुई के सिविल सर्जन सहित पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है, इसके अलावे कई स्वास्थकर्मियों को बर्खास्त कर दिया गया है।

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