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संतान प्राप्ति के लिए रखा जाता है अचला सप्तमी का व्रत, जाने क्या है इसकी प्रचलित कथा

Achala Saptami occurs on the seventh day of the bright fortnight of Magh month. Achala Saptami is also called Rath, Surya and Arogya Saptami. This year Achala Saptami is 19th February (Friday).

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 17फरवरी।
माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को अचला सप्तमी होता है। अचला सप्तमी को रथ, सूर्य और अरोग्य सप्तमी भी कहा जाता है। इस साल अचला सप्तमी 19 फरवरी (शुक्रवार) है।

अचला सप्तमी कथा-
एक गणिका इन्दुमती ने वशिष्ठ मुनि के पास जाकर मुक्ति पाने का उपाय पूछा। मुनि ने कहा, ‘माघ मास की सप्तमी को अचला सप्तमी का व्रत करो।’ गणिका ने मुनि के बताए अनुसार व्रत किया। इससे मिले पुण्य से जब उसने देह त्यागी, तब उसे इन्द्र ने अप्सराओं की नायिका बना दिया। एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र शाम्ब को अपने शारीरिक बल और सौष्ठव पर बहुत अधिक अभिमान हो गया था। शाम्ब ने अपने इसी अभिमानवश होकर दुर्वासा ऋषि का अपमान कर दिया। दुर्वासा ऋषि को शाम्ब की धृष्ठता के कारण क्रोध आ गया, जिसके पश्चात उन्होंने को शाम्ब को कुष्ठ हो जाने का श्राप दे दिया। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपने पुत्र शाम्ब से भगवान सूर्य नारायण की उपासना करने के लिए कहा। शाम्ब ने भगवान कृष्ण की आज्ञा मानकर सूर्य भगवान की आराधना करनी आरम्भ कर दी। जिसके फलस्वरूप सूर्य नारायण की कृपा से उन्हें अपने कुष्ठ रोग से मुक्ति प्राप्त हो गई।

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