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किसान आंदोलन के समर्थन में अधिवक्ता और संयुक्त किसान मोर्चा ने कचहरी में बाँटा पर्चा

किसान आंदोलन के समर्थन में अधिवक्ता और संयुक्त किसान मोर्चा ने कचहरी में बाँटा पर्चा

समग्र समाचार सेवा
वाराणासी, 18फरवरी।

पीएम के संसदीय क्षेत्र वाराणासी के अधिवक्ताओ और संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े लोग गुरुवार दोपहर बाद ज़िलाधिकारी पोर्टिको के सामने इकट्ठा होकर अधिवक्ता प्रेम प्रकाश सिंह यादव के नेतृत्व में पूरे कचहरी परिसर में अधिवक्ताओं व वादकारियों से मिलकर अधिवक्ताओं, संयुक्त किसान मोर्चा व नागरिक समाज द्वारा जारी पर्चा किसान विरोधी कृषि कानूनों के खिलाफ है बांटा गया और तीनों कृषि कानून किस प्रकार किसानों ही नहीं बल्कि मजदूरों और आम जन के खिलाफ है, देश व समाज के खिलाफ है, लोगों को बताया।

अधिवक्ताओं व नेतृत्वकारी ने बताया कि पहला कानून पूंजीपतियों को आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी व जमाखोरी का असीमित भंडारण का लाइसेंस जारी करता है। दूसरा कानून सरकारी मंडियों को समाप्त कर प्राइवेट मंडियों को अनियमित और गैरकानूनी तरीके से चलाने व किसानों के दोहन का लाइसेंस देता है । तीसरा कानून कांट्रैक्ट फार्मिंग के माध्यम से किसानों को गुलाम व बधुआ मजदूर बनाने की साजिश का लाइसेंस देता है। पर्चा बांटने के दौरान अधिवक्ताओं से लोगों ने सवाल पूछा की सरकार पीछे नहीं हट रही है उसका कारण बताते हुए अधिवक्ता ने कहा इस सरकार को ईवीएम पर भरोसा है एवं मीडिया के सहारे चुनाव आयोग के साथ मिलकर सरकार लोकतंत्र व जनादेश का गला घोट रही है।

लिहाजा किसानों के शहीद होने का सरकार को कोई गम नहीं है। दूसरा कारण सरकार में बैठे संविधान विरोधी लोग बिछड़े वर्ग की जातिगत जनगणना नहीं होने देना चाहते हैं क्योंकि पिछड़े वर्ग की जातिगत जनगणना होने से उनकी संख्या के अनुपात में उनकी भागीदारी, प्रतिनिधित्व, नौकरी और योजनाएं बनानी पड़ेगी। 1931 के बाद से पिछड़ी जातियों कि आज तक जातिगत जनगणना नहीं हुई।

प्रत्येक 10 वर्ष पर कोई न कोई बहाना बनाकर सरकार पिछड़े वर्ग के विरोधी लोगो को संख्या का एहसास नहीं होने देना चाहती। देश में जानवरों की जनगणना होती है लेकिन पिछले वर्ग के लोगों की जनगणना नहीं होती। हम लोग जब तक सरकार तीनों कृषि कानून वापस नहीं लेती और समर्थन मूल्य पर कानून नही बनाती तब तक आंदोलन जारी रखेंगे।

पर्चा बाटने व अधिवक्ता तथा वादकारियो को जागरुक करने में मुख्य रुप से एडवोकेट धर्मपाल कौशांबी, एडवोकेट बहादुर राजभर, एडवोकेट आनंद कुमार, एडवोकेट नागेंद्र कुमार यादव, एडवोकेट प्रेम नाथ शर्मा एडवोकेट शिव बहादुर पटेल, नंदलाल मास्टर, मनीष शर्मा, अनूप श्रमिक, संजीव सिंह, सागर गुप्ता, राम जनम यादव, प्रवाल, एडवोकेट अरविंद, एडवोकेट सुरेंद्र चरण सहित दर्जन लोगों ने भागीदारी किया।

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