समग्र समाचार सेवा
डुंडा उत्तरकाशी, 6 मार्च।
इंडियन हिमालयन कौंसिल फ़ॉर नालंदा बुद्धिष्ठ ट्रेडिशन के साथ इंटरनेशनल बुद्धिष्ठ कंफेडरेशन ने गाडेन फेलगिलंग संस्थान डुंडा में हिमालयी राज्यों में निवासरत बुद्धिष्ठ समुदाय का दो दिवशीय सम्मेलन आज से शुरू हुवा।।
उत्तराखंड बौद्ध सम्मेलन में मुख्य अतिथि के तौर पर गढ़वाल मंडल विकास निगम के निदेशक लोकेंद्र सिंह बिष्ट ने कहा कि समाज मे सदभाव व शांति के मार्ग पर चलने के लिए भगवान बुद्ध ने राजशाही ठाठबाट छोड़कर सन्यास ले लिया था। सिद्धार्थ गौतम ने पीपल वृक्ष के नीचे कठोर साधना व तपस्या की।

हिमालयी राज्यों में निवासरत बौद्ध समुदाय के लोगों की संस्कृति, समाज और जीवन के संरक्षण के लिए नरेंद्र मोदी जी की सरकार दृढ़ संकल्प है। इसी के मध्यनजर केंद्र सरकार के सहयोग से भारत के हर कोने में निवासरत बौद्ध समुदाय के संरक्षण के लिये सरकार कार्ययोजना बना रही है। बीजेपी नेता लोकेन्द्र सिंह बिष्ट ने ये बाते सम्मेलन में कही।।
हिमालयन बुद्धिष्ठ कल्चर एसोसिएशन के अध्यक्ष लामा छोत्सफेल जोत्सपा ने कहा कि भारत मे निवासरत बुद्धिष्ठ लोगों को देश की रक्षा में अहम योगदान है। इंटरनेशनल बुद्धिष्ठ कंफेडरेशन के महासचिव लामा डॉ धम्मापिया ने कहा कि बौद्ध समुदाय के लोगों को बुद्धम शरणम गच्छामि के साथ माँ गंगा के मायके उत्तरकाशी में रहने वाले बौद्ध ड्रम को मानने वाले समुदाय को मां गमगा की स्वच्छता व निरमलता पर भी कार्य करना चाहिये। उन्होंने कहाकि भारत देह की रक्षा में हिमालयी राज्यों में निवासरत बौद्ध समुदाय के लोगों की अहम भूमिका रहती है।
सम्मेलन में बौद्ध समुदाय से जुड़े हिमालयी राज्यों से कई प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। वीरपुर की प्रधान श्रीमती सुनीता
बगोड़ी की प्रधान श्रीमती सरिता रावत, पूर्व प्रधान भगवान सिंह, जयप्रकाश भट्ट, सोबनलाल, देशराज बिष्ट, नरेस रावत, कृष्णा राणा, यशपाल बिष्ट, प्रताप राणा , आनंदप्रकाश बौद्ध , भानु खाम्पा सहित कई जनप्रतिनिधियों व बौद्ध समुदाय के लोगों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया।।