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सिलाई-बुनाई से बीना भंडारी संवार रही महिलाओं की जिंदगी

Women have become self-sufficient in the modern era. At the same time, in the field of self-reliance, men are also giving stiff competition.

समग्र समाचार सेवा

नई टिहरी, 8मार्च।

आधुनिक युग में नारी स्वावलंबी हो चुकी है। वहीं स्वावलंबन के क्षेत्र में पुरुषों को भी कड़ी प्रतिस्पर्धा दे रही है। इसी कड़ी में चंबा निवासी बीना भंडारी अपने हुनर के बल पर गांव की युवती व महिलाओं को सिलाई, बुनाई, ब्यूटी पार्लर का प्रशिक्षण देकर उन्हें आर्थिक स्वावलंबन की राह दिखा रही है। इससे दर्जनों युवतियां व महिलाएं स्वरोजगार से जुड़कर अपने परिवार का आर्थिक सहयोग कर अपने सपने भी साकार रही हैं। चंबा निवासी बीना भंडारी को बचपन से ही सिलाई-बुनाई का शौक था। लेकिन पढ़ाई के बोझ के कारण वह इस ओर ध्यान नहीं दे सकी। शादी के बाद बीना ने पांच साल पहले अपने बचपन के ख्वाब को पूरा करने की ठानी। इसके लिए बीना भंडारी ने सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर और बुनाई का प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बनने का सपना पाल लिया। प्रशिक्षण के बाद आत्म विश्वास के साथ घर पर ही स्वरोजगार शुरू कर दिया। इसके लिए घर पर उन से कपड़े बुनना शुरू कर दिया। बीना का हुनर रंग लाया तो उनके उत्पादों को भी बाजार मिलने लगा। हाथ से बुनी हुई स्वाटरें हाथों हाथ बिकने लगी। इसके साथ ही बीना ने युवतियों और महिलाओं को भी इसका प्रशिक्षण देकर उनका हुनर निखारना भी शुरू कर दिया। फिर क्या था बीना को सिलाई-बुनाई के रोजगार से अच्छी खासी कमाई हो जाती है। बीना से प्रशिक्षण लेने के बाद समस्याओं से दो-चार रहने वाली महिलाएं अब घर ही सिलाई-कढ़ाई और बुनाई का काम करके 3 से 5 हजार रुपए प्रतिमाह की आमदनी कर लेती है। कुछ महिलाएं बुनाई का काम कर रही हैं तो कुछ सिलाई का काम कर रही हैं। खुद भी इससे अच्छी खासी आमदनी कर रही है। बीना कहती हैं कि घर के खर्चे पूरे करने की जिम्मेदारी सिर्फ पुरुषों की ही नहीं है, बल्कि महिलाएं भी इसमें अपना हाथ बटा सकती हैं। इसके लिए महिलाओं को भी खाली समय में स्वरोजगार के जरिए आगे आना चाहिए। इसमें कोई बुराई नहीं है।

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