समग्र समाचार सेवा
कोलकत्ता, 16 मार्च।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और कांग्रेस के विरोध जताने के बाद राज्यसभा से मनोनीत सदस्य स्वपन दासगुप्ता ने उच्च सदन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। बता दें कि भाजपा ने हुगली जिले के तारकेश्वर विधानसभा सीट से उन्हें चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया था, जिस पर टीएमसी और कांग्रेस ने सवाल खड़े किए थे। विवाद बढ़ता देख स्वपन दासगुप्ता ने मंगलवार को राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया।
इस संबंध में राज्यसभा में विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस ने सभापति वेंकैया नायडू ने स्पष्टीकरण मांगा। राज्यसभा सभापति को लिखी चिट्ठी में कांग्रेस के चीफ विप जयराम रमेशा ने यह बताया कि दासगुप्ता ने चुनाव लड़ने से पहले न तो सदन से इस्तीफा दिया है और न ही उन्होंने कोई और पार्टी ही जॉइन की है।
बंगाल में 6 अप्रैल को होने वाले तीसरे चरण के मतदान के लिए रविवार को बीजेपी ने 26 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया था जिसमें स्वपन दासगुप्ता का नाम भी था।
इससे पहले तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी आरोप लगाया था कि दासगुप्ता ने भारतीय संविधान की 10वीं अनुसूची के प्रावधानों का उल्लंघन किया है।
महुआ मोइत्रा ने कहा था कि स्वपन दासगुप्ता पश्चिम बंगाल चुनावों के लिए बीजेपी के उम्मीदवार हैं, जबकि संविधान की 10वीं अनुसूची कहती है कि अगर कोई राज्यसभा का मनोनीत सांसद शपत लेने और उसके 6 महीने के अंदर किसी भी राजनीतिक पार्टी में शामिल होता है उसे राज्यसभा की सदस्यता के लिए अयोग्य करार दे दिया जाएगा। दासगुप्ता को साल 2016 में शपथ दिलाई गई थी, जो अभी जारी है। अब उन्हें बीजेपी में शामिल होने के लिए अयोग्य करार देना चाहिए।

