समग्र समाचार सेवा
रायपूर, 23 मार्च।
राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने कहा है कि महिलाओं को लंबा संघर्ष और चुनौतियों का सामना करने के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए। साथ ही आत्मबल और इच्छा शक्ति को मजबूत रखते हुए आम धारणा को तोड़ने का प्रयास कर विशेष उपलब्धियां हासिल करना चाहिए। राज्यपाल सुश्री उइके आज यहां शहीद राजीव पांडेय सभागार में सखी फाउंडेशन रायपुर द्वारा आयोजित वीरांगना सम्मान समारोह को संबोधित कर रही थी। इस अवसर पर 
राज्यपाल सुश्री उइके ने कहा कि सखी फाउंडेशन स्वास्थ्य शिक्षा तथा महिला सशक्तिकरण की दिशा में काम कर रहा है, जो सराहनीय है। उन्होंने कहा कि आज हम जिनको सम्मानित कर रहे हैं, वाकई में वे भी वीरांगनाएं हैं, क्योंकि उन्होंने वह कर दिखाया है जो आम लोग नहीं कर पाते। इन महिलाओं ने अपने-अपने क्षेत्र में आज जो उपलब्धियां हासिल की है और जिस मुकाम पर पहुंची है वह रास्ता आसान नहीं था। उन्हें लंबा संघर्ष और कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, चाहे वह घर की हो या बाहर की।
राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी हर क्षेत्र में महिलाएं उपलब्धियां हासिल कर रही हैं। यदि हम कोरोना काल की बात करें तो महिलाओं ने स्वास्थ्य, सुरक्षा जैसे तमाम क्षेत्रों में पुरूषों के साथ कंधा से कंधा मिलाकर कार्य किया। कुछ जिलों में कलेक्टर के रूप में या पुलिस अधिकारी के रूप में अपनी भूमिका निभा रही है। हम पाएंगे कि कोरोना काल में स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी एक महिला के पास थी और उन्होंने अपनी भूमिका का बखूबी निर्वहन किया। इस समय प्रमुख विश्वविद्यालयों की कमान महिला वाइस चांसलर के कंधों पर है। ये सब महिलाएं हमारी बेटियों को प्रेरणा देती है कि वे आगे बढ़ते रहें और किसी भी हाल में हिम्मत न हारें।
सुश्री उइके ने उनके द्वारा गोद लिए गए गांव सल्फीपदर की जिक्र करते हुए कहा कि आज से कुछ समय इस गांव के पुरूष और महिलाएं राजभवन आए थे और मेरे साथ गांव के विकास के कुछ मुद्दों पर चर्चा की थी। उनकी बातों को सुनकर मैंने उस गांव को गोद लेने का निर्णय लिया। आज वह गांव विकास की राह पर है, यह वहां की रहने वाली महिलाओं की लगन और आत्मबल के फलस्वरूप हो पाया है।
इस समारोह की अध्यक्षता पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर केसरीलाल वर्मा ने की उन्होने भी अपने विचार व्यक्त किए।