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पश्चिम बंगाल में आबादी असंतुलन से पैदा हो रही हैं कई समस्याएं : घोष

Director of Dr. Abul Kalam Azad Institute of Asian Studies, Dr. Swaroop Prasad Ghosh has said that the rapidly growing Muslim

समग्र समाचार सेवा
कोलकाता,3 अप्रैल।

डॉ. अबुल कलाम आजाद इंस्टिट्यूट ऑफ एशियन स्टडीज के निदेशक डॉ. स्वरूप प्रसाद घोष ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में तेजी से बढ़ रही मुसलमानों की जनसंख्या गहन चिंता का विषय बन गई है। साल्ट लेक स्थित ईस्ट जोन कल्चरल सेंटर में पांचजन्य संवाद कार्यक्रम में अपना सम्बोधन देते हुए उन्होंने कहा कि बंगाल को अपना खोया हुआ गौरव पाना होगा और यह तभी सम्भव है जब हम ढाका की तरफ देखने की बजाय दिल्ली की तरफ हाथ बढ़ाएंगे। इस अवसर पर आरएसएस पूर्वी क्षेत्र सम्पर्क प्रमुख श्री विद्युत मुखर्जी, पांचजन्य के सम्पादक हितेश शंकर तथा प्रख्यात लेखक श्री रास बिहारी भी मौजूद थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री तरुण घोष ने की।
पश्चिम बंगाल की रक्तरंजित राजनीति पर आधारित श्री रास बिहारी की तीन पुस्तकों के विमोचन के उपरांत श्री विद्युत मुखर्जी ने कहा कि इन पुस्तकों में तथ्य परक पड़ताल के साथ बताया गया है कि कैसे वामपंथ शासन की खूनी राजनैतिक हिंसा तृणमूल सरकार में लगातार बेकाबू होती चली गई।
बंगाल के आर्थिक, सामाजिक और राजनैतिक हालात का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा जो लोग बाहरी का मुद्दा उठाकर बंगाल के विकास में बाधा खड़ी करने की साजिश रच रहें हैं।

पांचजन्य के सम्पादक श्री हितेश शंकर ने कहा कि बंगाल अब बदलाव के मूढ़ में है। लोग हिंसा की राजनीति से छुटकारा चाहते हैं। बंगाल को बेरोजगारी और आर्थिक बदहाली से निकलकर विकास और खुशहाली के रास्ते पर आगे बढ़ना होगा।

लेखक, पत्रकार और नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स-इंडिया के अध्यक्ष रास बिहारी ने पुस्तकों का विवरण देते हुए कहा कि राजनीतिक हिंसा की बड़ी वजह बंगाल में सत्तारूढ़ रहे दलों द्वारा सत्ता पर काबिज होने के लिये माफिया और सिंडिकेट राज को प्रश्रय देना है। सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस की गुटबाजी में बड़ी संख्या में लोगों की हत्या के पीछे वसूली, सिंडिकेट पर कब्जा, ठेके हड़पने आदि के लिये इलाका दखल की होड़ है। उन्होंने कहा कि बंगाल में राजनीतिक हत्याओं को छिपाने का पहले से सिलसिला चल रहा है। प्रशासन और पुलिस सत्ताधारी दलों के आगे नतमस्तक होकर विरोधी दलों के खिलाफ काम करते हैं। ममता सरकार में राजनीतिक हिंसा तेज़ी से बढ़ी है।

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