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हिमस्खलन: दारमा घाटी में ग्लेशियर गिरने से 400 भेड़ें जिंदा दफन

Till now, there were reports of avalanches in the summer season. But now the news of the glacier cracking at the beginning of summer

बी डी कसनियाल

पिथौरागढ़, 15अप्रैल। अभी तक गर्मियों के मौसम में हिमस्खलन की खबरें आती थी। लेकिन अब गर्मी की शुरूआत में ही ग्लेशियर दरकने की खबरों ने चिंता बढ़ा दी है। ताजा मामला पिथौरागढ़ के दारमा घाटी का है। यहां देर रात्रि को दारमा घाटी में ग्लेशियर गिरने से 400 भेड़ें जिंदा दफन होने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि कुछ ग्रामीण ग्लेशियर के बीच में फंस गए हैं लेकिन अभी कितने ग्रामीण हैं पुष्ठि नहीं हो पाई है। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि एसडीआरएफ, पुलिस, राजस्व पुलिस और पशु चिकित्सकों की टीम गांव में भेजी जा चुकी है।
पिथौरागढ़ जनपद के दारमा घाटी में देर रात्रि को ग्लेशियर दरक कर नीचे आ गया। इस दौरान वहां भेड़ों के झुंड ग्लेशियर की चपेट में आ गया। बताया जा रहा है कि भेड़ों के साथ कुछ ग्रामीण भी मौके पर थे, जो ग्लेशियर के बीच में फंस गए। एसडीएम धारचूला केएन गोस्वामी ने बताया कि भेड़ों के झुंड हिमाचल प्रदेश के रमेश गद्दी, नरेंद्र सिंह सुयाल, ओपीश्वर सिंह नेगी, लाल सिंह दरियाल की थी। बताया कि सूचना मिलते ही एसडीआरएफ, पुलिस, राजस्व पुलिस और पशु चिकित्सकों की टीम को घटना स्थल पर रवाना कर दिया था। अभी तक ग्लेशियर की चपेट में आए भेड़ों की सही संख्या का पता नहीं चल पाया है। वहीं दारमा घाटी के दांतू गांव के सामाजिक कार्यकर्ता शालू दयाल का कहना कि जिले के अधिक ऊंचाई वाले गांवों में इस साल गर्मी की शुरूआत में भारी बर्फबारी हुई है। जिस कारण भेड़ चराने वाले ग्रामीणों का ग्रीष्मकालीन प्रवास देरी से हुआ है। मुनस्यारी के सामाजिक कार्यकर्ता पूरन पांडे का कहना है कि इस साल अप्रैल के माह में पहली बार कई दशकों बाद 9 बार से अधिक बर्फबारी हुई है। इसके चलते ग्रामीणों ने अपने खेतों में फसल नहीं बो पाएं हैं। साथ ही बर्फबारी के कारण भेड़ों की ऊन के साथ ही उनके झुंडों को चराने की समस्या भी पैदा हो गई है। वहीं बड़ा सवाल यह है कि अधिक बर्फबारी के बाद ग्लेशियरों के दरकरने की घटना क्यों बढ़ रही है। इससे तीन दिन पूर्व भी जोशीमठ के सुमना में ग्लेशियर दरकने से हादसा हो गया था। वहीं गुंजी के पास एक और गलेशियर दरकने का खतरा बना हुआ है।

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