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जीन साइलेंसिंग टेक्निक चूहों पर सफल, कोरोना के नए इलाज में वैज्ञानिकों को कामयाबी

The results of research by Australian and American scientists have given new hope to get rid of Covid-19. Mendy's Health Institute and City of Hope Research and Treatment Center at Griffith University in Queensland, Australia have devised a revolutionary therapy.

सेवा समाचार सेवा ,
दिल्ली , 24 मई। ऑस्ट्रेलिया और अमेरिकी वैज्ञानिकों के शोध के नतीजों ने कोविड-19 से निजात पाने की नई उम्मीद दी है। ऑस्ट्रेलिया के क्वीन्सलैंड स्थित ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी के मेंडीज हेल्थ इंस्टिट्यूट और सिटी ऑफ होप रिसर्च एंड ट्रीटमेंट सेंटर ने एक क्रांतिकारी थेरेपी को ईजाद किया है।

इसकी मदद से कोविड-19 वायरस को टारगेट कर पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है। रिसर्च टीम का नेतृत्व करने वाले वैज्ञानिक नाइजेल मैकमिलन के मुताबिक आरएनए टेक्निक के जरिए शरीर मे घुसने वाले 99.9% वायरस को जड़ से खत्म किया गया।

चूहे में किए गये प्रयोग के दौरान फेफड़ों में फैले कोविड-19 वायरस को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया। रिसर्च में शामिल प्रोफेसर केविन मोरिस कहना है कि इस इलाज से सिर्फ कोविड19 ही नहीं, बल्कि भविष्य में आने वाले इसी तरह के किसी भी वायरस या उनके नए वैरिएंट का सटीक इलाज हो पाएगा।

इस थेरेपी को ईजाद करने के लिए वैज्ञानिकों ने जीन पर निशाना साधने वाली जीन साइलेंसिंग टेक्निक का इस्तेमाल किया है। जीन साइलेंसिंग टेक्निक 90 के दशक में ऑस्ट्रेलिया के पौधों में खोज की गई थी। इस तकनीक के जरिए वायरस के जीनोम को खत्म किया जाता है।

इस तकनीक से विकसित दवा को सिर्फ 4 डिग्री सेल्सियस तापमान में स्टोर किया जा सकता है। प्रोफेसर मोरिस कहते हैं कि इस तकनीक से बने इंजेक्शन गंभीर रोगियों को 4 से 5 दिन में ठीक कर देते है। नतीजे काफी उत्साह वर्धक है। लेकिन क्लीनिकल ट्रायल पूरे होते होते इसे आने में दो साल लग सकते हैं।

दवा मरीज के शरीर में मौजूद कोविड-19 के जीनोम को मार कर इसके संक्रमण को शरीर या फेफड़ों में बढ़ने से रोकती है। नतीजतन प्रतिरोधक सेल्स वायरस को खत्म कर देते है। इस थेरेपी को डायरेक्ट एक्टिंग एन्टी वायरल थेरपी कहा गया है। थेरेपी के दौरान लिपिड नैनो पार्टिकल के ज़रिए मरीज के फेफड़ों में दवा छोड़ी जाती है।

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