Site icon Samagra Bharat News website

तंबाकू सेवन करने वालों को कोरोना का खतरा ज्यादा- प्रोफेसर सक्सेना

Tobacco or any other form of intoxication in the Corona period adversely affects our health. Anyway, consumption of tobacco increases lung

समग्र समाचार सेवा
महू, 31मई। कोरोना काल में तंबाकू या किसी अन्य प्रकार का नशा हमारे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है. वैसे भी तंबाकू के सेवन से फेफड़े और श्वांस की बीमारी को बढ़ाता है. तंबाकू मुक्त दुनिया बनाने के लिए विश्वस्तर पर प्रयास किये जा रहे हैं. यह बात विश्व तंबाकू मुक्त दिवस पर बीआर अम्बेडकर यूर्निवसिटी ऑफ सोशल साइंस द्वारा आयोजित एक दिवसीय वेबीनार में बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय के एनएसएस संयोजक प्रोफेसर अंनत कुमार सक्सेना ने कहा. उन्होंने तंबाकू के उपयोग के खतरे के प्रति खासतौर पर युवाओं को सचेत करते हुए तंबाकू नियंत्रण कानून की भी जानकारी दी. प्रोफेसर सक्सेना ने कहा कि तंबाकू मुक्त समाज का निर्माण कानून से अधिक सामाजिक जागरूकता से आएगा. इस बारे में विभिन्न प्रकार से पहल कर लोगों को जगाना होगा. प्रोफेसर सक्सेना का कहना था कि बचपन से तंबाकू से होने वाले नुकसान के प्रति बताना होगा. तंबाकू का सेवन एक सामाजिक बुराई है और इस बुराई को जड़ से खत्म करना होगा. उन्होंने कहा कि तंबाकू नियंत्रण के लिए सामाजिक जागरूकता जरूरी है. जब लोग खुद तंबाकू का नुकसान समझेंगे तो हम तंबाकू मुक्त समाज का निर्माण कर सकेंगे. कार्यक्रम के आरंभ में तंबाकू मुक्त समाज निर्माण के लिए शपथ ग्रहण किया गया. कुलपति प्रोफेसर आशा शुक्ला का आयोजन में मार्गदर्शन एवं सहयोग रहा.
वेबीनार की संयोजक एवं शिक्षा अध्ययन शाला की डीन डॉ. मनीषा सक्सेना ने अपने अनुभव शेयर करते हुए बताया कि 80-90 के दशक में यूनिसेफ के साथ एक अध्ययन में इस बात की जानकारी मिली कि चंबल डिवीजन में जन्म लेने के बाद बच्चियों के मुंह में तंबाकू भारी मात्रा में भर दिया जाता था जिससे उनकी मृृत्यु हो जाती थी. तब चंबल में सेक्स रेटियो में बहुत अंतर था. एक हजार पुरुषों पर 890 या इससे कम स्त्रियों की संख्या थी. इस अध्ययन के बाद शासन स्तर पर पहल की गई तो आज स्थिति तुलनात्मक रूप से बेहतर है. उन्होंने कहा कि लोगों के मन में तंबाकू से होने वाले नुकसान के प्रति डर पैदा करना भी जरूरी है. डॉ. मनीषा सक्सेना ने कहा कि हम गोद लिये गांव को तंबाकू मुक्त करने का प्रयास करें. उन्होंने कहा कि आज हर आदमी खूबसूरत दिखना चाहता है तो उन्हें बताया जाए कि तंबाकू के सेवन से उनका सौंदर्य नष्ट होता है. इससे भी लोगों में जागरूकता आएगी.  तंबाकू मुक्त समाज बनाने के लिए डॉ. सक्सेना ने कहा कि हम लोग समूह तैयार करें और लोगों को जागरूक करें.
वेबीनार में प्रतिभागियों ने सवाल भी पूछे. एक प्रतिभागी का सवाल था कि दांत के दर्द में तंबाकू लगाने से आराम मिलता है. इस सवाल के जवाब में प्रोफेेसर सक्सेना ने कहा कि यह गलत है. दांतों में दर्द होने पर डेंटिस्ट की सलाह लें. तंबाकू से दांत का दर्द ठीक होगा या नहीं लेकिन शरीर में इसका कुप्रभाव पड़ेगा. एक अन्य सवाल के जवाब में प्रोफेसर सक्सेना ने कहा कि कानून से ज्यादा जरूरी आम आदमी में जागरूकता लाना है. एक अन्य प्रतिभागी ने सवाल किया कि पड़ोसी समझाने के बाद भी धूम्रपान नहीं छोड़ते हैं, क्या किया जाए. इस सवाल के जवाब में प्रोफेसर सक्सेना ने कहा कि कानून सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान एवं तंबाकू के सेवन को रोकता है. किसी के घर पर रोकना थोड़ा मुश्किल है. उन्होंने कहा कि परस्पर चर्चा कर उन्हें धूम्रपान से नुकसान और आसपास को होने वाले नुकसान के बारे में समझाया जाए तो बात बन सकती है.
समन्वयक डॉ. कृष्णा सिंहा ने आरंभ में अतिथियों का परिचय दिया. अंत में उन्होंने अतिथियों एवं अपने सहयोगियों का आभार व्यक्त किया. कार्यक्रम की सह-संयोजक सहायक कुलसचिव श्रीमती संध्या मालवीय, कुलसचिव डा. दीपक वर्मा का विशेष सहयोग रहा.

Exit mobile version