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397 ऑक्सीजन एक्सप्रेस रेल गाड़ियों ने पूरे देश में पहुंचाई ऑक्सीजन

Indian Railways continues to deliver Liquid Medical Oxygen (LMO) to various states of the country by overcoming all hurdles and devising innovative solutions.

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 10जून। भारतीय रेल सभी बाधाओं को पार करते हुए तथा नए समाधान निकाल कर देश के विभिन्न राज्यों में तरल चिकित्सा ऑक्सीजन (एलएमओ) पहुंचाना जारी रखे हुए है।

राष्ट्र की सेवा में ऑक्सीजन एक्सप्रेस द्वारा तरल चिकित्सा ऑक्सीजन पहुंचाने में 28000 मीट्रिक टन के आंकड़े को पार कर गई।  भारतीय रेल द्वारा अभी तक देश के विभिन्न राज्यों में 1628 से अधिक टैंकरों में लगभग 28060 मीट्रिक टन से अधिक तरल चिकित्सा ऑक्सीजन (एलएमओ) पहुंचाई गई है।

यहाँ पर यह बताना आवश्यक है कि 397 ऑक्सीजन एक्सप्रेस गाड़ियों ने अपनी यात्रा पूरी कर विभिन्न राज्यों को सहायता पहुंचाई है। इस विज्ञप्ति के जारी होने तक 5 ऑक्सीजन एक्सप्रेस रेलगाड़ियां 24 टैंकरों में 494 मीट्रिक टन से अधिक एलएमओ लेकर चल रही हैं। ऑक्सीजन एक्सप्रेस द्वारा तमिलनाडु में 3900 एमटी से अधिक तरल चिकित्सा ऑक्सीजन (एलएमओ) पहुंचाई गई है।

ऑक्सीजन एक्सप्रेस द्वारा आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में क्रमशः 3100 और 3400 मीट्रिक टन से अधिक तरल चिकित्सा ऑक्सीजन (एलएमओ) पहुंचाई गई है। ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने 45 दिन पहले 24 अप्रैल को महाराष्ट्र में 126 मीट्रिक टन तरल मेडिकल ऑक्सीजन की डिलीवरी करने के साथ अपना काम प्रारंभ किया था।

भारतीय रेलवे का यह प्रयास रहा है कि ऑक्सीजन का अनुरोध करने वाले राज्यों को जहाँ तक संभव हो, कम से कम समय में अधिक से अधिक ऑक्सीजन पहुंचाई जा सके। ऑक्सीजन एक्सप्रेस द्वारा 15 राज्यों- उत्तराखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, हरियाणा, तेलंगाना, पंजाब, केरल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, झारखंड और असम को ऑक्सीजन सहायता पहुंचाई गई है।

इस विज्ञप्ति के जारी होने तक महाराष्ट्र में 614 मीट्रिक टन ऑक्सीजन, उत्तर प्रदेश में लगभग 3797, मध्य प्रदेश में 656 मीट्रिक टन, दिल्ली में 5722 मीट्रिक टन, हरियाणा में 2354 मीट्रिक टन, राजस्थान में 98 मीट्रिक टन, कर्नाटक में 3450 मीट्रिक टन, उत्तराखंड में 320 मीट्रिक टन, तमिलनाडु में 3972 मीट्रिक टन, आंध्र प्रदेश में 3130 मीट्रिक टन, पंजाब में 225 मीट्रिक टन, केरल में 513 मीट्रिक टन, तेलंगाना में 2765 मीट्रिक टन, झारखंड में 38 मीट्रिक टन और असम में 400 मीट्रिक टन ऑक्सीजन पहुंचाई गई है।

अब तक ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने देश भर के 15 राज्यों में लगभग 39 नगरों /शहरों में एलएमओ पहुंचाई है। इन शहरों में उत्तर प्रदेश में लखनऊ, वाराणसी, कानपुर, बरेली, गोरखपुर और आगरा, मध्य प्रदेश में सागर, जबलपुर, कटनी और भोपाल, महाराष्ट्र में नागपुर, नासिक, पुणे, मुंबई और सोलापुर, तेलंगाना में हैदराबाद, हरियाणा में फरीदाबाद और गुरुग्राम, दिल्ली में तुगलकाबाद, दिल्ली कैंट और ओखला, राजस्थान में कोटा और कनकपारा, कर्नाटक में बेंगलुरु, उत्तराखंड में देहरादून, आंध्र प्रदेश में नेल्लोर, गुंटूर, तड़ीपत्री और विशाखापत्तनम, केरल में एर्नाकुलम, तमिलनाडु में तिरुवल्लूर, चेन्नई, तूतीकोरिन, कोयंबटूर और मदुरै, पंजाब में भटिंडा और फिल्लौर, असम में कामरूप और झारखंड में रांची शामिल हैं।

भारतीय रेल ने ऑक्सीजन सप्लाई स्थानों के साथ विभिन्न मार्गों की मैपिंग की है और राज्यों की बढ़ती हुई आवश्यकता के अनुसार अपने को तैयार ऱखा है। भारतीय रेल को एलएमओ लाने के लिए टैंकर राज्य प्रदान करते हैं।

पूरे देश से जटिल परिचालन मार्ग नियोजन परिदृश्य में भारतीय रेल ने पश्चिम में हापा, बड़ौदा मुंदड़ा, पूर्व में राउरकेला, दुर्गापुर, टाटा नगर, अंगुल से ऑक्सीजन लेकर उत्तराखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, हरियाणा, तेलंगाना, पंजाब, केरल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश तथा असम को ऑक्सीजन की आपूर्ति की है।

ऑक्सीजन सहायता तेज गति से पहुंचाना सुनिश्चित करने के लिए रेलवे ऑक्सीजन एक्सप्रेस माल गाड़ी चलाने में नए और बेमिसाल मानक स्थापित कर रही है। लंबी दूरी के अधिकतर मामलों में माल गाड़ी की औसत गति 55 किलोमीटर से अधिक रही है। उच्च प्रथमिकता के ग्रीन कॉरिडोर में आपात स्थिति को ध्यान में रखते हुए विभिन्न मंडलों के परिचालन दल अत्यधिक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम कर रहे हैं ताकि तेज संभव समय में ऑक्सीजन पहुंचाई जा सके। विभिन्न सेक्शनों में कर्मियों के बदलाव के लिए तकनीकी ठहराव (स्टॉपेज) को घटाकर 1 मिनट कर दिया गया है।

रेल मार्गों को खाली रखा गया है और उच्च सतर्कता बरती जा रही है ताकि ऑक्सीजन एक्सप्रेस समय पर पहुंच सकें। यह सभी काम इस तरह किया जा रहा है कि अन्य माल की ढ़ुलाई के परिचालन में कमी नहीं आए।

नई ऑक्सीजन लेकर जाना बहुत ही गतिशील कार्य है और आंकड़े हर समय बदलते रहते हैं। देर रात ऑक्सीजन से भरी और अधिक ऑक्सीजन एक्सप्रेस गाड़ियां यात्रा प्रारंभ करेंगी।

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