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यूपी सरकार का एक और अहम फैसला: नए सत्र से मोबाइल एप पर पढ़ेंगे मदरसा बोर्ड के छात्र

UP government will also be able to study through the mobile app. Madrasa board member Jirgamuddin told that the board has proposed

समग्र समाचार सेवा
लखनऊ, 25जून। यूपी की सरकार के राज्य के मदरसे में पढ़ने वाले ढाई लाख से ज्यादा छात्र भी मोबाइल एप के जरिए पढ़ाई कर सकेंगे। मदरसा बोर्ड के सदस्य जिरगामुददीन ने बताया कि मोबाइल एप तैयार करने का प्रस्ताव बोर्ड को भेज दिया गया है। बोर्ड परीक्षाफल घोषित होने के बाद मोबाइल एप तैयार कराने का काम किया जाएगा।

बोर्ड पूरी कोशिश करेगा कि नए सत्र से छात्र मोबाइल एप पर अपनी पढ़ाई कर सके। यूपी मदरसा बोर्ड के सदस्य जिरगामुददीन ने बताया कि प्रदेश में 558 अनुदानित मदरसे और करीब 17 हजार निजी मदरसे संचालित हो रहे हैं। इसमें करीब ढाई लाख से अधिक छात्र पढ़ रहे हैं।
मोबाइल एप तैयार करने का प्रस्‍ताव बोर्ड को भेज दिया गया है। बोर्ड परीक्षाफल घोषित होने के बाद मोबाइल एप तैयार कराने का काम किया जाएगा। उन्‍होंने बताया कि बोर्ड पूरी कोशिश करेगा कि नए सत्र से छात्र मोबाइल एप पर अपनी पढ़ाई कर सके।

यूपी मदरसा बोर्ड के सदस्‍य जिरगामुददीन बने बताया कि प्रदेश में 558 अनुदानित मदरसे और करीब 17 हजार निजी मदरसे संचालित हो रहे हैं। इसमें करीब ढ़ाई लाख से अधिक छात्र पढ़ रहे हैं। सरकार लगातार मदरसा छात्रों को बेहतर शिक्षा मुहैया कराने के प्रयास कर रही है। इसी वजह से इस सत्र में मदरसों में ऑनलाइन शिक्षा दिए जाने का काम शुरू किया गया है। इसके लिए मदरसा शिक्षको को ऑनलाइन ही मदरसा बोर्ड की निगरानी में प्रशिक्षित कराया जा रहा है। ट्रेनिंग प्रोग्राम में कई एक्‍सपर्ट भी शामिल किए गए हैं। शिक्षकों को ऑनलाइन शिक्षा को प्रभावी कैसे बनाया जाए इन बातों को बताया जा रहा है। जिरगामुददीन ने बताया कि मोबाइल एप को बनवाकर इसी सत्र से बच्‍चों की पढ़ाई कराई जाना थी लेकिन कोविड संक्रमण के चलते अब छात्र नए सत्र से मोबाइल एप पर पढ़ाई कर सकेंगे।

यूपी भाषा समिति के सदस्‍य दानिश आजाद बताते हैं कि प्रदेश में 558 अनुदानित मदरसे और करीब 17 हजार निजी मदरसे संचालित हो रहे हैं। मदरसा छात्रों का राहत देने के लिए उनका सिलेबस कम किया गया। पहले छात्रों को 12 से 15 किताबों से पढ़ाई करना पड़ती थी लेकिन सिलेबस कम हो गया है, सिर्फ 7 से 8 किताबों को लागू किया गया। जो पेपर लम्‍बे-लम्‍बे आते थे, उनको सेक्‍शन में बांट कर छोटा किया गया। इससे छात्रों को काफी सहूलियत हुई है।

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