समग्र समाचार सेवा
रायपुर, 24अगस्त। सकारात्मक सोच से मन को उर्जा मिलती है और असाध्य बीमारियों का इलाज भी हो जाता है। कोरोना काल में संक्रमण से ग्रसित मरीजों से बातचीत कर मैंने उन्हें मानसिक संबल प्रदान किया। जिस से उन्हें अस्पताल जाने की आवश्यकता कम पड़ी और वे आइसोलेशन में ही स्वस्थ हो गए। यह बात राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने छत्तीसगढ़ मेंटल हेल्थ काउंसिल के उद्घाटन समारोह के दौरान कही। उन्होंने मेंटल हेल्थ काउंसिल के छत्तीसगढ़ चेप्टर का वर्चुअल शुभारंभ किया। वूमेन इंडियन चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने इस वेबीनार का आयोजन किया।

उन्होंने कहा कि लोग शारीरिक रूप से अस्वस्थ होने पर डॉक्टर के पास जाते है। किंतु मानसिक रूप से अस्वस्थ होने की बात स्वीकार नहीं करते और उसके इलाज के लिए मनोरोग विशेषज्ञ के पास नहीं जाना चाहते। मानसिक स्वास्थ्य के संबंधी जागरूकता लाने के लिए यह सबसे पहले आवश्यक है कि हम इसे स्वीकारें। समाज में आज भी बहुत बड़ी संख्या में लोग मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूक ही नहीं है। उन्होंने कहा कि मार्च 2020 में लॉकडाउन लगते ही, हम सबकी दुनिया पूरी तरह थम सी गयी थी। आइसोलेशन और क्वारेंटाइन वाले जीवन की हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी। इन सबका असर बड़ी मात्रा में मानसिक स्वास्थ्य पर अवश्य पड़ा है।
उन्होंने कहा कि जो महिलाएं अपने घर का मैनेजमेंट करती है जिनको आमतौर पर हम सब हाउस वाइफ कहते हैं वे महिलाएं मानसिक अस्वस्थता की सबसे बड़ी शिकार होती हैं। साथ ही इन महिलाओं की तरफ शायद ही किसी संस्था ने संगठित होकर इस तरीके से कार्य करने का आयोजन किया है जो कि आपकी संस्था कर रही है। ऐसे में हमारे सामने एक बहुत बड़ा तबका उन महिलाओं का भी है जिन्हें अपने कार्य क्षेत्र की जिम्मेदारियों के साथ-साथ घर की जिम्मेदारियां भी बखूबी निभानी पड़ती है। यह कह सकते हैं कि इन महिलाओं को दो नाव में पांव रखकर चलना होता है।
इस अवसर पर वेबीनार में डॉ. हरबीन अरोरा, डॉ. सौम्या गोयल, डॉ. जे.सी.अजवानी और डॉ. वर्षा वरवंडकर सहित देश व प्रदेश के मनोचिकित्सक, शिक्षाविद, विद्यार्थी वर्चुअली जुड़े हुए थे।