Site icon Samagra Bharat News website

सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश, भू राजस्व रेकॉर्ड से पुजारियों के नाम हटाया जाए

The Supreme Court has given this decision in the case of a temple in Madhya Pradesh. The court has made it clear in its decision that

समग्र समाचार सेवा
भोपाल, 7सितंबर। मंदिर के नाम की संपत्ति का मालिक कौन है। इसे लेकर हमेशा असमंजस की स्थिति रहती थी। प्रबंधन के लोग और पुजारी इन संपत्तियों पर दावा करते थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनका भ्रम दूर करते हुए कहा है कि मंदिर के नाम की संपत्ति के मालिक देवता ही होंगे। पुजारी और प्रबंधन समिति के लोग सेवक ही रहेंगे। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि भू राजस्व रेकॉर्ड से पुजारियों के नाम हटाए जाएं।

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के एक मंदिर के मामले में यह फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया है कि देवता ही मंदिर से जुड़ी भूमि के मालिक हैं। पुजारी केवल इन संपत्तियों के रखरखाव के लिए हैं। जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने इस मामले में आयोध्य सहित पहले के कई फैसलों का जिक्र किया है।

उन्होंने कहा कि मंदिर की जमीन का पुजारी काश्तकार नहीं, सिर्फ रक्षक है। वह एक किराएदार जैसा है। कोर्ट ने कहा कि मंदिर में जो भी पुजारी होगा, वही वहां देवी देवताओं को भोग लगाएगा। साथ ही मंदिर से संबंधित जमीन पर खेती बारी का काम भी संभालेगा।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने यह भी कहा कि सभी रेकॉर्ड में पुजारी की स्थिति सेवक के रूप में ही होगी, भूस्वामी की नहीं। देवता की मान्यता कानूनी व्यक्ति के रूप में विधि सम्मत है, लिहाजा पुजारियों के नाम भू राजस्व रेकॉर्ड से हटाए जाएं। भूस्वामी के तौर उस समुचित कॉलम में देवता का ही नाम ही रहेगा।

Exit mobile version