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भारत-ऑस्ट्रेलिया की ‘टू प्लस टू’ मंत्रिस्तरीय वार्ता, इन मुद्दों पर बनी सहमति

Bilateral and regional issues were discussed in depth in the '2+2' ministerial talks between India and Australia on Saturday.

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 12 सितंबर। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच शनिवार को हुई ‘2+2’ मंत्रिस्तरीय वार्ता में द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर गहन चर्चा की गई। इसके अलावा अफगानिस्तान, इंडो-पैसिफिक में समुद्री सुरक्षा, बहुपक्षीय स्वरूपों में सहयोग और अन्य संबंधित मुद्दों पर मंथन किया गया। व्यापार के मुक्त प्रवाह, अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन और पूरे क्षेत्र में सतत आर्थिक विकास सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। दोनों देश व्यापक रणनीतिक साझेदारी के साथ संयुक्त रूप से काम करने के लिए सहमत हुए हैं।

दोनों देश व्यापक रणनीतिक साझेदारी के साथ संयुक्त रूप से काम करने को हुए सहमत
बैठक के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने बयान में कहा कि आज भारत-ऑस्ट्रेलिया मंत्री स्तरीय ‘टू प्लस टू’ वार्ता में मैंने और विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर विदेश मंत्री मारिस पायने और रक्षा मंत्री पीटर डटन के साथ गहन और व्यापक चर्चा की। हमने रक्षा सहयोग और वैश्विक महामारी के खिलाफ लड़ाई सहित व्यापक सहयोग के लिए विभिन्न संस्थागत ढांचे पर चर्चा की है। इसके अलावा अफगानिस्तान, हिंद-प्रशांत में समुद्री सुरक्षा, बहुपक्षीय प्रारूपों में सहयोग और अन्य संबंधित विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। दोनों देश व्यापक रणनीतिक साझेदारी के साथ संयुक्त रूप से काम करने के लिए सहमत हुए हैं। इससे मुक्त, खुले, समावेशी और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साझा दृष्टिकोण पर आधारित सैन्य साझेदारी का विस्तार होगा।

उन्होंने कहा कि भारत-ऑस्ट्रेलिया मंत्रिस्तरीय वार्ता के लिए आए ऑस्ट्रेलिया के दोनों मंत्रियों का स्वागत करना एक बड़े सम्मान और खुशी की बात है। ‘टू प्लस टू’ संवाद भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी के महत्व को दर्शाता है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच महत्वपूर्ण साझेदारी है जो मुक्त, खुले, समावेशी और समृद्ध भारत-प्रशांत क्षेत्र के साझा दृष्टिकोण पर आधारित है। दो लोकतंत्रों के रूप में पूरे क्षेत्र की शांति और समृद्धि में हमारा समान हित है। रक्षा मंत्री ने कहा कि आज हमने द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर मंत्री पायने और मंत्री डटन के साथ गहन और व्यापक चर्चा की है। हमने रक्षा सहयोग और वैश्विक महामारी के खिलाफ लड़ाई सहित व्यापक सहयोग के लिए विभिन्न संस्थागत ढांचे पर चर्चा की है।

द्विपक्षीय रक्षा सहयोग पर सैन्य जुड़ाव का विस्तार करने पर भी दोनों देश हुए राजी
रक्षी मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि हमने अफगानिस्तान, हिंद-प्रशांत में समुद्री सुरक्षा, बहुपक्षीय स्वरूपों में सहयोग और अन्य संबंधित विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। चर्चा के दौरान दोनों पक्षों ने व्यापार के मुक्त प्रवाह, अंतरराष्ट्रीय नियमों और मानदंडों का पालन और पूरे क्षेत्र में सतत आर्थिक विकास सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। द्विपक्षीय रक्षा सहयोग पर हमने सैन्य जुड़ाव का विस्तार करने, अधिक रक्षा सूचना साझा करने की सुविधा प्रदान करने और आपसी समर्थन के लिए मिलकर काम करने का निर्णय लिया है। रक्षा सहयोग के संदर्भ में दोनों पक्षों को मालाबार अभ्यासों में ऑस्ट्रेलिया की निरंतर भागीदारी को देखकर प्रसन्नता हुई।

विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने कहा कि ‘टू प्लस टू’ संवाद के दौरान हमने अपने पड़ोसी क्षेत्रों के विकास पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। अफगानिस्तान स्पष्ट रूप से चर्चा का एक प्रमुख विषय था। हम इस बात पर सहमत हुए कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2,593 द्वारा निर्देशित अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अपने दृष्टिकोण में एकजुट होना चाहिए। क्वाड एक ऐसा मंच है, जहां 4 देश अपने लाभ और दुनिया के लाभ के लिए सहयोग करने आए हैं। मुझे लगता है कि नाटो (चीन द्वारा) जैसा शब्द शीत युद्ध का शब्द है। क्वाड भविष्य को देखता है। यह वैश्वीकरण और एक साथ काम करने के लिए देशों की मजबूरी को दर्शाता है।

विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ऑस्ट्रेलिया के साथ ‘टू प्लस टू’ मंत्रिस्तरीय वार्ता के बाद संयुक्त बयान जारी करते हुए ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री पीटर डटन ने कहा कि मैं 9/11 की सालगिरह को स्वीकार करता हूं, यह आतंकवाद के बर्बर कृत्यों की याद दिलाता है। भारत एक उभरती हुई इंडो-पैसिफिक महाशक्ति है। हम दोनों व्यापार और आर्थिक कल्याण के लिए इंडो-पैसिफिक में समुद्री लाइनों के लिए स्वतंत्र और खुले माहौल पर निर्भर हैं। बैठक के बाद ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री सुश्री मारिस पायने ने कहा कि हम भारत-प्रशांत पर आसियान दृष्टिकोण के व्यावहारिक कार्यान्वयन का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। दोनों पक्षों की साझा इच्छा यह देखने के लिए है कि हमारे देशों के बीच यात्रा फिर से शुरू हो। ऑस्ट्रेलिया वापस आने वाले भारतीय छात्रों का स्वागत करने के लिए हवाई अड्डे पर उपस्थित रहने वालों में मैं खुद शामिल रहूंगी।

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