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जानिए कब है गज लक्ष्मी व्रत, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

According to the beliefs of Hindu religion, Mahalakshmi fast begins every year on the Ashtami date of Shukla Paksha of Bhadrapada

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 28 सितंबर। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार हर वर्ष भाद्रपद के ​शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से महालक्ष्मी व्रत की शुरुआत होती है और 16 दिनों तक चलने वाले इस व्रत का समापन ​अश्विन मास में कृष्ण पक्ष अष्टमी को किया जाता है. यह व्रत महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है और कहा जाता है कि इस व्रत को करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. इस वर्ष गज लक्ष्मी व्रत 29 सितंबर को बुधवार के दिन रखा जाएगा.

गज लक्ष्मी व्रत में माता लक्ष्मी के गज पर विराजमान स्वरूप की पूजा की जाती है. इसमें माता लक्ष्मी गज यानि हाथी पर कमल के आसन पर विराजमान होती हैं. हिंदू मान्यताओं के अनुसार माता के इस स्वरूप की विधि विधान से पूजा अर्चना करने से घर में सुख-समृद्धि और धन—वैभव का आगमन होता है. आइए जानते व्रत का शुभ मुहुर्त और पूजा विधि.

गज लक्ष्मी व्रत की तिथि और शुभ मुहूर्त
गज लक्ष्मी व्रत अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि से शुरू होगा. यानि इस बार यह व्रत 28 सितंबर मंगलवार के दिन शाम 6:07 बजे से शुरू होकर 29 सितंबर बुधवार के दिन रात 8:29 बजे तक रहेगा.

गज लक्ष्मी व्रत की पूजा विधि
इन दिन गज लक्ष्मी मां का पूजन किया जाता है. इस व्रत में माता लक्ष्मी के साथ ही उनकी सवारी हाथी का पूजन करने का विशेष महत्व है.

  1. इस व्रत को करने के लिए सबसे पहले सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें. पहले दिन हल्दी से रंगा 16 गांठ वाला रक्षासूत्र अपने हाथ में बांधे.
  2. गज लक्ष्मी के व्रत 16 दिनों तक चलते हैं. यदि व्रतधारी किसी कारणवश 16 दिनों तक व्रत न कर पाएं तो तीन दिन तक भी व्रत कर सकते हैं. इसमें पहले दिन, आठवें दिन और सोलहवें दिन व्रत किया जाता है.
  3. व्रत में अन्न ग्रहण नहीं किया, इसमें केवल दूध और फलों को सेवन किया जाता है.
  4. व्रत के 16वें दिन पूजा के स्थान पर आटे और हल्दी से चौक बनाकर कलश स्थापित करें.
  5. इसके बाद मां लक्ष्मी और हाथी की मूर्ति वहां रख दें.
  6. ध्यान रखें करते समय कलश के के ऊपर रखी कटोरी में सोने-चांदी के आभूषण या सिक्के जरूर रखें. इसे शुभ माना जाता है.
  7. इसके बाद मां लक्ष्मी को फूलों की माला पहनाएं और चालीस का पाठ करें. चालीसा के बाद मां लक्ष्मी की आरती जरूर करें.
  8. फिर दीपक जलाकर मां लक्ष्मी की पूजा करें और मंत्रों का जाप करें. व्रत में लक्ष्मी चालीसा और आरती भी करें.
  9. 16वें दिन महालक्ष्मी व्रत का उद्यापन किया जाता है. इस दिन 16 गांठ वाले इस रक्षासूत्र को नदी में विसर्जित करें.
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