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महात्मा गांधी के सम्मान में,दुनिया का सबसे बड़ा खादी का राष्ट्रीय ध्वज

In Leh, Mahatma Gandhi was paid tribute with the world's largest Khadi national flag.Pride and Patriotism, the collective spirit of Indianness
इंद्र वशिष्ठ
लेह में महात्मा गांधी को दुनिया के सबसे बड़े खादी के राष्ट्रीय ध्वज के साथ श्रद्धांजलि दी गई।
गर्व और देशभक्ति, भारतीयता की सामूहिक भावना और खादी की विरासत शिल्पकला ने 2 अक्टूबर को लेह में खादी सूती वस्त्र  से बने दुनिया के सबसे बड़े राष्ट्रीय ध्वज को सलामी देने के लिए राष्ट्र को एक साथ खड़ा किया ।
खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) ने महात्मा गांधी को सर्वोच्च सम्मान देने के लिए यह स्मारक खादी का राष्ट्रीय ध्वज तैयार किया है, जिन्होंने खादी को दुनिया को सबसे अधिक पर्यावरण के अनुकूल वस्त्र की सौगात दी ।
225 फीट लंबा, 150 फीट चौड़ा-
स्मारकीय राष्ट्रीय ध्वज 225 फीट लंबा, 150 फीट चौड़ा तथा (लगभग) 1400 किलोग्राम वजनी है।
इस स्मारकीय राष्ट्रीय ध्वज के निर्माण से खादी कारीगरों और संबद्ध श्रमिकों के लिए लगभग 3500 मानव घंटे अतिरिक्त कार्य का सृजन हुआ।
इस  झंडे को बनाने में 4600 मीटर हाथ से काते हुए, हाथ से बुने हुए खादी कॉटन बंटिंग का इस्तेमाल किया गया है, जो 33, 750 वर्ग फुट के कुल क्षेत्रफल को आवरित करता है। ध्वज में अशोक चक्र का व्यास 30 फीट है। इस झंडे को तैयार करने में 70 खादी कारीगरों को 49 दिन लगे। मुंबई के खादी डायर्स एवं प्रिंटर्स ने यह झंडा तैयार किया है।
लेह में विशाल तिरंगे का अनावरण-
लेह में ध्वज का अनावरण लद्दाख के उपराज्यपाल आरके माथुर ने किया, इस अवसर उन्होंने कहा कि स्मारकीय राष्ट्रीय ध्वज प्रत्येक भारतीय को देशभक्ति की भावना से बांधेगा।
इस अवसर पर थल सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे, लद्दाख के सांसद जे.टी. नामग्याल, और
 केवीआईसी के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना उपस्थित थे।
उपराज्यपाल ने कहा कि “स्वतंत्रता के 75 वें वर्ष में यह स्मारक राष्ट्रीय ध्वज विविधता में भारत की अखंडता, इसके पुनरुत्थान, हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और खादी कारीगरों की शिल्प कौशल का प्रतीक है।
तिरंगा झंडा पूरे देश में जाएगा।
महात्मा गांधी और हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों को उचित श्रद्धांजलि के साथ ही यह ध्वज देशवासियों में देशभक्ति की भावना जगाएगा क्योंकि ध्वज को पूरे भारत में विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में प्रदर्शित किया जाएग ।
झंडा सेना को सौंपा-
खादी और ग्रामोद्योग आयोग ने स्वतंत्रता के 75 वर्ष “आजादी का अमृत महोत्सव” मनाने के लिए ध्वज की अवधारणा बनाई और उसे तैयार किया । चूंकि, इस आयाम के राष्ट्रीय ध्वज को संभालने और प्रदर्शित करने के लिए अत्यंत सावधानी और सटीकता की आवश्यकता होती है, केवीआईसी ने भारतीय सेना को ध्वज सौंप दिया है।
सेना ने लेह शहर में एक पहाड़ी की प्रमुख चोटी पर झंडा प्रदर्शित किया। सेना ने झंडे को प्रदर्शित करने के लिए एक फ्रेम तैयार किया है ताकि वह जमीन को न छुए। सेना के 57 इंजीनियर रेजीमेंट ने यह कार्य किया।
ध्वज को 9 बराबर भागों में विभाजित किया गया है, प्रत्येक का वजन 100 किलोग्राम है और प्रत्येक भाग का माप 50 x 75 फीट है। 12 मिमी रस्सी वाले चारों तरफ नेफा प्रदान किया गया है। कुल 12 उच्च गुणवत्ता वाली नायलॉन की रस्सियाँ – अर्थात ऊपर और नीचे की तरफ 3 रस्सियाँ और बाएँ और दाएँ तरफ 3 रस्सियाँ लगभग 3000 किग्रा.  ब्रेकिंग लोड क्षमता के साथ लगाई गई हैं।
इसके अलावा, प्रत्येक रस्सी के दोनों सिरों पर एक लूप  है जो सामूहिक रूप से ध्वज का भार धारण कर सकता है। झंडे को बनाने के लिए इन हिस्सों को एक साथ सिला गया है और जोड़ों को इस तरह से सिला गया है कि नेफा के अंदर की रस्सियाँ दिखाई नहीं देंगी । नेफा की अंदरूनी परत रासायनिक रूप से लेपित खादी बंटिंग से बनी है जो रस्सियों से घर्षण को कम करती है और झंडे के कपड़े को नुकसान से बचाती है। झंडे के रंगों के साथ विलय करने के लिए तिरंगे में नेफा दिया गया है।
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