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श्री पीयूष गोयल ने आसियान गुट से की अपील, गैर-टैरिफ बाधाओं को जल्द करें दूर

The Union Minister of Commerce & Industry, Consumer Affairs and Food and Public Distribution and Textiles, Shri Piyush Goyal has urged

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 9अक्टूबर। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग, उपभोक्ता मामले एवं खाद्य तथा सार्वजनिक वितरण और कपड़ा मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आसियान गुट से गैर-टैरिफ बाधाओं ( एनटीबी) को दूर करने की अपील की है। सीआईआई द्वारा आयोजित ‘‘क्षेत्र के व्यापार मंत्रियों के साथ विशेष पूर्ण अधिवेशन: भारत-आसियान व्यवसाय ‘‘ को संबोधित करते हुए श्री गोयल ने अक्सर आसियान के बाहर की तीसरी पार्टियों द्वारा मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने‘ की भी अपील की।

श्री गोयल ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये अपने संबोधन में कहा, ‘ यह दुर्भाग्य की बात है कि हाल के दिनों में हमें आसियान क्षेत्र में हमारे निर्यातों, विशेष रूप से कृषि तथा ऑटो सेक्टरों में कई प्रतिबंधात्मक बाधाओं का सामना करना पड़ा। मैं समझता हूं कि इनका परिणाम भारत सहित अन्य देशों से केवल पारस्परिक कार्रवाइयों के रूप में आएगा जिससे हमारे नेताओं के दोनों देशों के बीच व्यापार को विस्तारित करने की दीर्घ अवधि इच्छा को चोट पहुंचेगी।

श्री गोयल ने आसियान के पक्ष में विषम व्यापार असंतुलन को ठीक करने के लिए भारत से आयातों को पारस्परिक एफटीए छूटों की अनुमति देने की भी आसियान गुट से अपील की।

श्री गोयल ने कहा, ‘‘ भारत वर्तमान में आसियान देशों से विशाल मात्रा में आयात का अवलोकन कर रहा है जबकि हमारे निर्यात आसियान देशों से एफटीए छूटों, एनटीबी, आयात विनियमनों, कोटा तथा निर्यात करों में गैर-पारस्परिकता के कारण बाधित हो रहे हैं। ऐसी समीक्षा समसामयिक व्यापार प्रचलनों, प्रक्रियाओं तथा नियामकीय सामंजस्य के साथ समन्वयन में सक्षम बनायेगी। ‘‘

उन्होंने कहा कि ‘ भारत-आसियान क्षेत्र का लगभग 80 बिलियन डॉलर का वर्तमान व्यापार वैश्विक रूप से सबसे बड़े व्यापारिक क्षेत्र में एक है। व्यापार बढ़ने के बावजूद, हम 200 बिलियन डॉलर के लक्ष्य से पीछे हैं जिसे भारत और आसियान द्वारा 2022 तक अर्जित किया जाना था।

श्री गोयल ने टैरिफ में कमी करने के जरिये व्यापार बढ़ाने के बजाये उचित, न्यायसंगत, पारदर्शी, पारस्परिक तथा समावेशी व्यापार के महत्व को दोहराया।

उन्होंने कहा, ‘ मुझे यह भी रेखांकित करने दीजिये कि अगर हम वस्तुओं में आसियान-भारत व्यापार (एआईटीआईजीए) की समीक्षा करें तो यह वास्तव में दोनों पक्षों के व्यापार को बढ़ावा दे सकता है, दोनों पक्षों के उद्योग तथा विनिर्माण की सहायता कर सकता है तथा वास्तविक रूप से आधुनिक, प्रगतिशील अर्थव्यवस्था बनने में दूसरे का समर्थन करने में मदद कर सकता है। ‘‘

इस वर्ष भारत-आसियान साझीदारी की 25वीं वर्षगांठ है। आसियान के साथ भारत का द्विपक्षीय व्यापार सतत रूप से बढ़ता रहा है। आसियान को भारत का वस्तु व्यापार 2010 के 23 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2020 में 30 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जबकि आसियान से भारत को आयात 2010 के 30 बिलियन डॉलर के मुकाबले तेजी से बढ़कर 2020 में 44 बिलियन डॉलर तक जा पहुंचा।

श्री गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में, भारत की ‘‘पूर्व की ओर देखो‘‘ नीति ‘पूर्व के लिए काम करो‘ की नीति में रूपांतरित हो चुकी है। 12 नवंबर, 2020 को 17वें भारत-आसियान सम्मेलन में, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आसियान कोविड-रिस्पांस फंड में योगदान देने की घोषणा की थी।

उन्होंने कहा कि, ‘‘ कोविड-19 महामारी के दौरान, भारत ने पूरी दुनिया को अपनी क्षमता तथा सामर्थ्य दिखाया है। हमने न केवल अपनी सभी अंतरराष्ट्रीय सेवा प्रतिबद्धताओं को पूरा किया बल्कि पीपीई सहित महत्वपूर्ण चिकित्सकीय आपूर्तियों के उत्पादन में भी आत्मनिर्भर बन गए। ‘‘

उन्होंने कहा, ‘ हम दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान को कार्यान्वित कर रहे हैं, अभी तक 930 मिलियन टीका खुराकों से आगे निकल चुके हैं, और शीघ्र ही 1 बिलियन की संख्या तक पहुंचने वाले हैं। हमें उम्मीद है कि अगले कुछ सप्ताह के भीतर भारत में सभी वयस्कों को टीके लग चुके होंगे और अगले 3-4 महीनों में देश भर के सभी इच्छुक वयस्कों को दोनों खुराकें लग चुकी होंगी। हमारा एक दिन का रिकॉर्ड 23 मिलियन टीकों को पार करने का है। ‘‘

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