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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का 96वें स्थापना दिवस: हिंदुओं को बल संपन्न और संगठित होने की जरूरत- मोहन भागवत

On the occasion of Vijayadashami and 96th foundation day of Rashtriya Swayamsevak Sangh, Rashtriya Swayamsevak Sangh chief Mohan Bhagwat

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 15अक्टूबर। विजयादशमी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 96वें स्थापना दिवस के मौके पर राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने शस्त्र पूजन किया। नागपुर में आरएसएस मुख्यालय पर मौजूद भागवत ने इस दौरान स्वंयसेवकों को संबोधित किया। मोहन भागवत ने कहा कि देश में अराजकता का माहौल बनाया जा रहा है, कुछ कट्टरपंथी लोग देश को बांटने का काम कर रहे हैं। इसलिए हिंदुओं को बल संपन्न और संगठित होने की जरूरत है और यही सभी समस्याओं का हल भी है। उन्होंने कहा कि देश में जनसंख्या असंतुलन बड़ी समस्या बन रहा है। सीमावर्ती राज्यों में घुसपैठ से आबादी बढ़ रही है। इसके अलावा उन्होंने नाम लिए बिना ड्रग्स और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर सरकार को भी नसीहत दे डाली।नागुपर में हुए इस कार्यक्रम में इजरायल के राजनयिक कोब्बी शोशानी भी पहुंचे।

संघ प्रमुख ने कहा कि आज हिंदुओं के मंदिरों की जमीनों को हड़पा जा रहा है। इसलिए यह जरूरी है कि हिंदू मंदिरों का संचालन हिंदू भक्तों के ही हाथों में रहे तथा मंदिरों की सम्पत्ति का उपयोग हिंदू समाज की सेवा में ही हो। इसके लिए हमें सब प्रकार के भय से मुक्त होना होगा। दुर्बलता ही कायरता को जन्म देती है। बल, शील, ज्ञान तथा संगठित समाज को ही दुनिया सुनती है। सत्य तथा शान्ति भी शक्ति के ही आधार पर चलती है। ‘ना भय देत काहू को, ना भय जानत आप…’ ऐसे हिन्दू समाज को खड़ा करना पड़ेगा। जागरुक, संगठित, बलसंपन्न व सक्रिय समाज ही सब समस्याओं का समाधान है।

संघ प्रमुख ने कहा कि घुसपैठियों के कारण जनसंख्या संतुलन बिगड़ रहा है। खास तौर पर सीमावर्ती राज्यों में आबादी असंतुलित हो गई है। इसलिए जनसंख्या नीति पर विचार होना जरूरी है।
कश्मीर में धारा 370 हटने के बाद आम लोगों को फायदा हुआ है। वहां आतंकी अपने डर के कारण टिके हुए थे, लेकिन 370 हटने के बाद वह डर खत्म हो गया है। इसलिए आतंकियों ने मनोबल गिराने के लिए फिर से 90 के दशक की टारगेट किलिंग शुरू की है, लेकिन अब लोग डरने वाले नहीं हैं। प्रशासन को चुस्ती से इसका बंदोबस्त करना पड़ेगा।

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि देश में अराजकता का माहौल बनाया जा रहा है। राज्य आपस में लड़ रहे हैं, पुलिस आपस में लड़ रही है। इसलिए राज्यों के बीच तालमेल होना जरूरी है। पर्व, त्योहार पर मेलजोल बढ़ना चाहिए।

मोहन भागवत ने कहा कि आजादी के बाद विभाजन का दर्द मिला। विभाजन की टीस अब तक नहीं गई है। हमारी पीढ़ियों को इतिहास के बारे में जानना चाहिए, जिससे आने वाली पीढ़ी अपने आगे की पीढ़ी को बता पाएं कि देश के लिए बलिदानियों की आकाश गंगा चली आ रही है।

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