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छठ महापर्व विशेष- छठ क्यों मनाया जाता है उसका पौराणिक महत्व

Chhath Mahaparv Special- Why Chhath is celebrated, its mythological significance

बी के . मल्लिक। श्रीमद् देवी भागवत के अनुसार स्वयंभू मनु एवं शतरूपा के पुत्र प्रियव्रत अत्यंत प्रतापी राजा हुए परंतु उनके कोई संतान नहीं थी।तब राजा ने ऋषि कश्यप से इसका उपाय पूछा तो ऋषि कश्यप ने पुत्रेष्टि यज्ञ करने को कहा। पुत्रेष्टि यज्ञ के पश्चात प्रसाद रूप खीर राजा प्रियव्रत ने अपनी पत्नी मालिनि को दिया।

प्रसाद के फलस्वरुप मालिनि ने एक पुत्र को जन्म दिया लेकिन वह पुत्र मृत पैदा हुआ तब राजा प्रियव्रत और रानी मालिनी अत्यंत दुखी हो गए। राजा प्रियव्रत अपने मृत पुत्र को लेकर शमशान की तरफ चले गए और उन्होंने स्वयं भी प्राण त्याग देने का निश्चय कर लिया।तभी उन्होंने देखा कि आकाश मार्ग से एक दिव्य प्रकाश उनकी ओर आ रहा है जबवह प्रकाश उनके समीप आया तो उन्होंने देखा की एक देवी स्वर्ण जड़ित सिंहासन पर बैठे उनके सम्मुख उपस्तिथ है। तब राजा ने पूछा कि हे देवी आप कौन हैं?

तो देवी ने कहा कि सृष्टि की अधिष्ठात्री देवी प्रकृति ने सृष्टि निर्माण हेतु स्वयं को 6 भागों में प्रकट किया मैं उनमें से षष्ठी हूं इसलिए मेरा नाम षष्ठी देवी है। तब देवी ने पूछा राजन तुम्हारा मुंह इतना मलिन क्यों है। राजा ने अपनी सारी आपबीती देवी मां को कह सुनाइ।तब देवी मां ने उस राजा के मृत पुत्र को अपनी गोद में उठा लिया मां का स्पर्श पाते ही वह बालक जीवित हो उठा।तब राजा ने जय जयकार करते हुए देवी से उनके पूजा का विधि विधान पूछा।और इस प्रकार छठी मैया के पूजन का त्योहार छठ महापर्व आरम्भ हुआ।

 

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