Site icon Samagra Bharat News website

बिरसा मुंडा के पोते श्री सुखराम मुंडा 16 नवंबर को श्री अर्जुन मुंडा की उपस्थिति में दिल्ली हाट में आदि महोत्सव का करेंगे उद्घाटन

Development Federation of Ministry of Tribal Affairs Limited (TRIFED) memory of great tribal freedom fighter Bhagwan Birsa Munda

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 15 नवंबर। जनजातीय कार्य मंत्रालय का जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ लिमिटेड (ट्राइफेड) महान आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा की स्मृति में आजादी का अमृत महोत्सव मनाने के लिए “आदि महोत्सव” 2021 का आयोजन कर रहा है। आदि महोत्सव एक राष्ट्रीय जनजातीय उत्सव है, जिसे 16 से 30 नवंबर, 2021 तक दिल्ली हाट, नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। बिरसा मुंडा के पोते श्री सुखराम मुंडा और केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री अर्जुन मुंडा 16 नवंबर, 2021 को शाम 6.30 बजे महोत्सव का उद्घाटन करेंगे।

जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्रीमती रेणुका सिंह, जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री बिस्वेश्वर टुडू और ट्राइफेड के अध्यक्ष श्री रामसिंह राठवा उद्घाटन समारोह के विशिष्ट अतिथि होंगे।

जनजातीय संस्कृति, शिल्प, भोजन और वाणिज्य की भावना का उत्सव- आदि महोत्सव- एक सफल वार्षिक पहल है, जिसे 2017 में शुरू किया गया था। यह त्योहार देश भर में आदिवासी समुदायों के समृद्ध और विविध शिल्प, संस्कृति से लोगों को एक ही स्थान पर परिचित कराने का एक प्रयास है।

दिल्ली हाट में फरवरी 2021 में आयोजित राष्ट्रीय जनजातीय महोत्सव में आदिवासी कला तथा शिल्प, औषधि तथा उपचार, व्यंजन और लोक मंचन का प्रदर्शन और बिक्री शामिल थे, जिसमें देश के 20 से अधिक राज्यों के लगभग 1000 आदिवासी कारीगरों, कलाकारों और रसोइयों ने भाग लिया और अपनी समृद्ध पारंपरिक संस्कृति की एक झलक प्रस्तुत की।

नवंबर के आयोजन में भी देश भर में हमारी जनजातियों की समृद्ध और विविध विरासत को दर्शाया जाएगा, जो उनकी कला, हस्तशिल्प, प्राकृतिक उत्पाद तथा स्वादिष्ट व्यंजनों में देखा जाता है। उम्मीद है कि 200 से अधिक स्टालों के माध्यम से एक बार फिर 15 दिवसीय उत्सव में 1000 आदिवासी कारीगर और कलाकार भाग लेंगे।

प्राकृतिक सादगी की विशेषता, आदिवासी लोगों की कृतियों की कालातीत अपील है। हस्तशिल्प की विस्तृत श्रृंखला जिसमें हाथ से बुने हुए सूती, रेशमी कपड़े, ऊन, धातु शिल्प, टेराकोटा, मनका-कार्य शामिल हैं तथा इन सभी को संरक्षित करने एवं बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

Exit mobile version