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भाजपा नेता(टैंट वाला)के बिल्डर साले ललित गोयल को ED ने गिरफ्तार किया

The Enforcement Directorate (ED) has arrested builder Lalit Goyal, Managing Director of M/s IREO Group. Sudhanshu Mittal is the
इंद्र वशिष्ठ
प्रवर्तन निदेशालय( ईडी) ने मैसर्स आईआरईओ ग्रुप के प्रबंध निदेशक बिल्डर ललित गोयल को गिरफ्तार किया है। दिल्ली में सुधांशु टैंट वाला के नाम से मशहूर भाजपा नेता सुधांशु मित्तल ललित गोयल के जीजा है।
ललित गोयल पर निवेशकों, खरीददारों और अन्य लोगों के पैसे में गड़बड़ी/हेराफेरी/धोखाधड़ी और मनी लांड्रिंग का आरोप है।
यह मामला 16.11.2021 को दर्ज धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (मनी लॉंड्रिंग) के  तहत घर खरीदारों/निवेशकों और अन्य लोगों के साथ धोखाधड़ी और धन की  हेराफेरी से संबंधित है।
 ईडी ने आईआरईओ ग्रुप ,ललित गोयल और अन्य के खिलाफ पंचकूला, दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा और  हौज खास थाने में दर्ज  प्राथमिकी के आधार पर मामले की जांच शुरु की थी।
ललित गोयल और अन्य द्वारा अपनाए गए तौर-तरीकों में विभिन्न संस्थाओं से धन की रूटिंग शामिल है टैक्स हेवन देशों जैसे ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (बीवीआई), मॉरीशस आदि में फंड का डायवर्जन, इक्विटी शेयरों को वापस खरीदने का तरीका, खातों की किताबों में काल्पनिक खर्च लिखना आदि शामिल है। यह मामला 2600 करोड़ रुपए का है।
 575 करोड़ रुपए विदेश ले गया-
हाल ही में पैंडोरा पेपर्स लीक में ललित गोयल का नाम सामने आया था।  जिसके मुताबिक ललित की विदेश में  77.73 मिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक मूल्य(लगभग 575 करोड़ रुपए) की संपत्तियां हैं । ललित ने अपना पता सिंगापुर दिखाया है।
पैंडोरा पेपर्स की जांच में खुलासे के अनुसार  गोयल ने 77 मिलियन डॉलर की संपत्ति, निवेश और शेयरहोल्डिंग को एक ऑफशोर ट्रस्ट स्ट्रक्चर में स्थानांतरित कर दिया था, जिसमें ब्रिटिश वर्जिन में पंजीकृत चार संस्थाएं शामिल थी।
ग्वेर्नसे(Guernsey)स्थित विदेशी ट्रस्ट, जो भारत के बाहर संपत्ति रखने वाली संस्थाओं का मालिक है और उन्हें नियंत्रित करता है।
ईडी को जांच में पता चलता है कि ललित गोयल सेटलर और एक लाभार्थी हैं।
 अमेरिका भाग रहा था।-
ललित गोयल को 11 नवंबर को तड़के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर उस समय हिरासत में लिया गया, जब वह देश छोड़ कर अमेरिका भागने की कोशिश कर रहा था। ईडी ने ललित के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी किया हुआ था।
ललित गोयल ने पूछताछ के दौरान ईडी से सहयोग नहीं किया और कुछ भी खुलासा नहीं किया। जिसके बाद 16 नवंबर को ललित को गिरफ्तार कर लिया गया।
विशेष अदालत ने ललित को 7 दिन की ईडी हिरासत में रिमांड पर भेज दिया है
जालसाजी धोखाधड़ी का मामला-
 आईरियो ग्रुप के दो निवेशकों ने कंपनी के वाइस प्रेसिंडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर ललित गोयल के खिलाफ जालसाजी और ठगी का मुकदमा दर्ज कराया था। ललित गोयल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने वाली पहली कंपनी है अमेरिका की एक्सॉन कैपिटल। इसके बाद अमेरिका की चिल्ड्रेन इनवेस्टमेंट फंड फाउंडेशन  ने भी दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा में कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज कराया। इन दोनों के अलावा दुनिया के कुछ बड़े निवेशकों जैसे, स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी, टाइगर पार्टनर्स और यूनिवर्सिटी ऑफ नॉट्रेडम ने भी कंपनी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। सभी ने कंपनी के वाइस प्रेसिंडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर ललित गोयल के खिलाफ जालसाजी का मामला दर्ज कराया है।
फरवरी, 2018 में एक्शॉन कैपिटल और चिल्ड्रेन इनवेस्टमेंट फंड फाउंडेशन  ने अपनी शिकायत में कहा कि उन्होने आईरियो ग्रुप में करीब 2000 करोड़ (दो हजार करोड़) रुपये का निवेश किया। जिसमें से कंपनी ने करीब 650 करोड़ रुपये की हेराफेरी की। इसके बाद इन्हींं दो कंपनियों ने मई 2018 में दोबारा शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत में कंपनी पर 10 हजार करोड़ रुपए की हेराफेरी का आरोप लगाया गया।
घोटाला-
भारत के कानून के अनुसार कोई भी विदेशी कंपनी कृषि भूमि को खरीद नहीं सकती। आईरियो ग्रुप के ज्यादातर शेयर विदेशी कंपनियों के पास हैं। ऐसे में ललित गोयल ने निवेशकों से कहा कि वे स्थानीय रियल इस्टेट कंपनियों से जमीन खरीदेंगे। इसके बाद ललित गोयल ने कमांडर रियल्टर्स  नाम की कंपनी बनाई। इस कंपनी के सौ फीसदी शेयर ललित गोयल के पास हैं। कमांडर रियल्टर्स ने स्थानीय रियल इस्टेट कंपनियों से जमीन खरीदी तो जरुर, लेकिन जमीन आईरियो  ग्रुप को कभी ट्रांसफर नहीं की गईं। पूरे दस हजार करोड़ रुपए का इकलौता मालिक ललित गोयल बन बैठा।
ललित गोयल का बयान-
ललित गोयल ने मामला उजागर होने पर तब मीडिया में कहा था कि आईरियो में उसकी हिस्सेदारी महज 10 फीसदी के आसपास है। बाकी 90 फीसदी शेयरों के मालिक दूसरे लोग हैं। अगर कंपनी ने अपने निवेशकों के साथ कोई धोखा किया है तो इसकी जानकारी कंपनी के मेजर शेयर होल्डर्स को होगी।
इनकम टैक्स की रेड-
इससे पहले 2010 में ललित गोयल पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट और ईडी ने छापेमारी की थी। छापेमारी आईरियो ग्रुप में गलत तरीके से निवेश करने के संबंध में थी।अब तक उस केस में क्या हुआ, इसकी जानकारी किसी को नहीं है।
सिंगापुर में आशियाना बनाया-
आईरियो ग्रुप में घर खरीदने के लिए सैकड़ों निवेशकों ने अपनी गाढ़ी कमाई लगा दी लेकिन सालों बाद भी उन्हें घर नसीब नहीं हुआ। आईरियो ग्रुप के मालिक ललित गोयल ने निवेशकों से अरबों रुपए वसूल करने के बाद भी न तो उन्‍हें घर दिया  और न ही उनके पैसे वापस कर रहे हैं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट भी ललित गोयल को आदेश दे चुका है।  ललित गोयल ने भारत में निवेशकों का पैसा हड़पने के बाद निवेशकों को तो आशियाना दिया नहीं, बल्कि अपना ठिकाना बदल लिया और सिंगापुर पहुंच गया।
  77 मिलियन डॉलर-
ललित गोयल ने भारत में अपनी कम्‍पनी में 500 करोड़ का घाटा दिखाया था, जबकि पैंडोरा पेपर्स बता रहे हैं कि ललित गोयल ने 77 मिलियन डॉलर का निवेश किया हुआ है।
 सुप्रीम कोर्ट की फटकार-
आईरियो के खिलाफ निवेशकों द्वारा घर या पैसा वापस न देने को लेकर दायर याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश का अनुपालन न करने के लिए आईरियो को फटकार भी ल्रगाई थी। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एम आर शाह की पीठ ने 19 अगस्त 21 को आईरियो समूह की कंपनी के खिलाफ अपना अवमानना आदेश दिया था। पीठ ने टिप्पणी की थी कि बिल्डर केवल पैसे का रंग या जेल की सजा को ही समझते हैं।
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