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कल मनाई जाएगी गुरु नानक देव की जयंती, यहां जानें उनके जीवन के 10 अनमोल उपदेश

Guru Nanak Dev was the founder and first Guru of Sikhism. Hence his birth anniversary is celebrated in Sikhism as Prakash Parv or Guru Parb.

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 18नवंबर। गुरु नानक देव सिख धर्म के संस्थापक और सबसे पहले गुरु थे। इसलिए उनकी जयंती को सिख धर्म में प्रकाश पर्व या गुरु पर्ब के नाम से मनाया जाता है। सिख धर्म में गुरु नानक जयंती का विशेष महत्व है और सिखों के लिए यह सबसे बड़ा पर्व है। इस दिन गुरुद्वारों में सबद कीतर्न का आयोजन होता है। गुरु नानक देव जयंती हर साल कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। इस साल यह 19 नवंबर, शुक्रवार के दिन पड़ रही है।

गुरु नानक देव के 10 उपदेश

गुरु नानक देव ने ‘इक ओंकार’ का मंत्र दिया था. उनका कहना था कि ईश्वर एक है और सभी जगह मौजूद है. हम सबका पिता वही है इसलिए सबके साथ प्रेम पूर्वक रहना चाहिए.
गुरु नानक देव ने लोगों को लोभ त्यागकर नीतिपूर्वक धन कमाने का उपदेश दिया. उन्होंने कहा था कि धन कमाकर मानवता के कल्याण में उसका उपयोग करना चाहिए.
नानक देव ने हक की बात कही थी और उनका मानना था कि कभी भी किसी का हक नहीं छीनना चाहिए. बल्कि मेहनत और ईमानदारी की कमाई में से जरूरतमंदों की भी मदद करनी चाहिए.
धन को हमेशा जेब तक ही सीमित रखना चाहिए. उसे कभी भी अपने हृदय में स्थान नहीं देना चाहिए. ऐसा करने से स्वंय का ही नुकसान होता है.
हमेशा स्त्री जाति का आदर-सम्मान करना चाहिए. गुरु नानक देव स्त्री व पुरुष सभी को एक समान मानते थे.
मनुष्य को हमेशा तनाव मुक्त रहकर अपना काम निरंतर करते रहना चाहिए और सदैव प्रसन्न रहना चाहिए.
गुरु नानक देव का कहना था कि संसार को जीतने से पहले स्वयं अपने विकारों पर बुराईओं पर विजय पाना आवश्यक है.
अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन है और इसलिए कभी अहंकार नहीं करना चाहिए. बल्कि विनम्र होकर सेवा भाव से अपना जीवन व्यतीत करें.
गुरु नानक देव पूरे संसर को एक घर मानते थे और उनका मानना था कि संसार में रहने वाले लोग परिवार का हिस्सा हैं.
गुरु नानक देव ने लोगों को प्रेम, एकता, समानता, भाईचारा और आध्यात्मिक ज्योति का संदेश दिया.

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