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40वां अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेला-2021- राजस्थान मंडप में हल्के वजन एवं गर्माहट के लिये पसंद की जा रही हैं जयपुरी रजाईयॉं

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 19 नवम्बर। नई दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहे 40 वें अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेला के राजस्थान मंडप में जयपुरी रजाईयों कोे आगन्तुकों द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है और उनके हल्के वजन, कोमलता एवं गर्माहट की खासियत के लिये भरपूर सराहना की जा रही है। मंडप में राजस्थानी रजाईयों की व्यापाक एवं भरपूर रेंज उपलब्ध हैं।

राजस्थान मंडप में जयपुरी रजाईयों के स्टॉल संचालक मोहम्मद युसुफ ने बताया कि मात्रा 100 ग्राम वजन से तैयार जयपुरी रजाईयों को आगंतुक काफी पसंद कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जयपुरी रजाईयां बनाना बुनकरों का वंशानुगत व्यवसाय है और इसे वे पिछली कई पीढ़ीयों से करते आ रहे हैं। इसे बनाने में घर के बुजुर्गो से लेकर महिलाएं भी अपना पूर्ण योगदान करती हैं। उन्होंने बताया कि जयपुर के जुलाहा सर्दी के मौसम में घरेलू उपयोग में आने वाले सभी प्रकार के उत्पादों को बनाते हैं, लेकिन रजाई बनाने में उन्हें विशेष योग्यता प्राप्त है। सर्दियों में दैनिक उपयोग के लिये रजाई की उच्च गुणवत्ता का उत्पादन उनकी विशेष पहचान है।

मोहम्मद युसुफ ने बताया कि रजाईयों को बनाने के लिए बेहतरीन सामग्री का उपयोग किया जाता है, वजन में हल्की होने के बावजूद ये बहुत ही गर्म और आरामदायक होती है। इनको बनाने में उच्च श्रेणी की शुद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण कपास का प्रयोग किया जाता है। साथ ही आधुनिक फैशनेबल एवं राजस्थानी डिजाइनों में इन्हें बनाया जा रहा है जिसे ग्राहकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है। उन्होंने बताया कि ग्राहकों के लिये अलग-अलग आकृति और आकार में रजाईयां उपलब्घ हैं।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष स्टॉल पर रजाईयां 500 से 5000 तक की रेंज में उपलब्ध है श्री ताहिर ने बताया कि राजस्थान की शुद्ध कपास से पारंपरिक सांगानेरी हैंड ब्लॉक प्रिंट में विश्व प्रसिद्ध जयपुरी डबल बेड की रजाईयां भी बनाई जा रही हैं जो कि दर्शकों द्वारा काफी पसंद की जाती हैं। जयपुरी रजाई अपने कम वजन, कोमलता और गर्मी के लिये विशेषरूप से जानी जाती हैं।

उन्होंने बताया कि इसके अलावा फाईवर और बनारसी जरी बॉर्डर पर सुंदर पुष्प डिजाईन और गहरे रंगों की रजाईयां भी बनाई जाती हैं। मंडप में जयपुरी सिल्क के बहुत ही गुणवत्ता के कॅवर भी उपलब्ध है जो कि दर्शकों को काफी पसंद आ रहे हैं।

मोहम्मद युसुफ ने बताया कि जयपुरी रजाई बनाने की इस विशेष कला के लिये उनके पिता मोहम्मद हनीफ को राज्य एवं अन्य प्रसिद्ध पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है। उन्होंने बताया कि राजस्थली का हमेशा प्रयास रहा है कि ग्राहकों को उत्पादनों से अधिकतम संतुष्टि प्राप्त हो। हमें अपने ग्राहकों को अधिकतमक संतुष्टि और उनकी सभी जरूरतों को पूरा करने में बहुत ही खुशी मिलती है।

युसुफ ने बताया कि जयपुरी रजाईयों के अतिरिक्त स्टॉल पर रूई से बनी जैकैट्स की भी बिक्री की जा रही है, जिसकी रेंज 800 रूपये से 2000 रूपये तक रखी गई है।

 

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