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केरल हाईकोर्ट का फैसला, शादी में बेटी को माता-पिता से मिला उपहार नही होता दहेज

Now the Kerala High Court has given a clear decision on this. The High Court has said in its decision that at the time of marriage, the

समग्र समाचार सेवा
कोच्ची, 15दिसंबर। दहेज एक ऐसा अभिशाप है, जो बेवजह हजारों-लाखों लड़कियों को मौत के मुंह में धकेल देता है। और कुछ को उनके पति और ससुराल वाले छोड़ देते हैं। लेकिन क्या शादी के समय लड़की को माता-पिता से मिलने वाले उपहार को भी दहेज की श्रेणी में रखा जा सकता है। इस पर अब केरल हाईकोर्टने एक स्पष्ट फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि शादी के समय बेटी को उसके सुखी जीवन के लिए दिए जाने वाले उपहार को दहेज निरोधक कानून, 1961 के अंतर्गत दहेज की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट की सिंगल बैंच ने ठोडियूर के रहने वाले एक व्यक्ति की याचिका पर यह फैसला सुनाया है।

दरअसल ठोडियूर निवासी व्यक्ति ने कोल्लम जिला दहेज निरोधक अधिकारी के उस आदेश के खिलाफ एक याचिका दाखिल की थी, जिसमें अधिकारी ने दुल्हन के माता-पिता द्वारा उपहार में दिए गए आभूषणों को दुल्हन को वापस करने का आदेश दिया था।
कानूनन दुल्हन के माता-पिता द्वारा शादी पर दुल्हन को उपहार स्वरूप दिए गए सोने के आभूषण दहेज की श्रेणी में नहीं आते हैं. इसी बात को मुद्दा बनाते हुए याचिकाकर्ता हाईकोर्ट के समक्ष पेश हुआ और कहा कि ऐसे में दहेज निरोधक अधिकारी को इस मामले में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है। हाईकोर्ट के जज ने दहेज निरोधक अधिकारी के आदेश को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि यह स्पष्ट नहीं है. कोर्ट ने कहा, यह भी स्पष्ट नहीं है कि अधिकारी ने यह सुनिश्चित किया या नहीं कि आभूषण दहेज के रूप में दिए भी गए हैं या नहीं।

महिला की मांग है कि शादी पर उसे उपहार में दिया गया 55 सोवरन गोल्ड ओर्नामेंट उसे वापस किया जाए. महिला ने बताया कि उसके आभूषण को एक को-ऑपरेटिव बैंक के लॉकर में बंद रखा गया है. याचिकाकर्ता ने कहा कि वह लॉकर में बंद आभूषण और दुल्हन के परिवार द्वारा उसे उपहार में दिया गया नेकलेस उसके परिवार को ही वापस लौटा देगा. महिला के इस बात पर राजी होने के बाद मामला खत्म हुआ।

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