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कृषि क्षेत्र की प्रगति में कृषि विज्ञान केंद्रों व वैज्ञानिकों की बड़ी भूमिका – श्री नरेंद्र सिंह तोमर

Union Minister Shri Tomar said that wherever there is a KVK in the country, he has done a great job in upgrading the agriculture sector,

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 29 दिसंबर। पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्य- असम, अरूणाचल प्रदेश व सिक्किम में कृषि के विकास में योगदान देने वाले कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अंचल-6), गुवाहाटी के नवनिर्मित प्रशासनिक भवन का लोकार्पण आज केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किया। इस अवसर पर श्री तोमर ने कहा कि देश में कृषि क्षेत्र की प्रगति में कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) और वैज्ञानिकों की महत्‍वपूर्ण भूमिका है, जिनके कारण खाद्यान्न के मामले में दुनिया में भारत आज आत्मनिर्भर ही नहीं बल्कि अधिकांश उपज के उत्पादन में नंबर एक या दो पर है और बेहतर स्थिति में है।

केंद्रीय मंत्री श्री तोमर ने कहा कि देश में जहां भी केवीके है, वहां कृषि क्षेत्र को उन्नत करने, किसानों की आमदनी बढ़ाने, फसलों के विविधीकरण व बीजों के आविष्कार में उन्होंने बहुत अच्छा काम किया है। इसका परिणाम आज दृष्टिगोचर होता है लेकिन अभी और भी काम करने की आवश्यकता है। अनेक चुनौतियां हैं, जिनका शीघ्रता से समाधान करने में वैज्ञानिकों व केवीके की बड़ी भूमिका है। विभिन्न क्षेत्रों में जलवायु अनुरूप खेती में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने प्रशंसनीय काम किया है। पूर्वोत्तर हमारे देश का प्रमुख क्षेत्र है, जो दुर्गम है लेकिन वहां के लोग, फसलें, जलवायु आदि हमारे लिए एक बड़ी पूंजी है। पूर्वोत्तर क्षेत्र में जितना काम होना चाहिए था, पहले नहीं हो पाया लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कार्यभार संभालने के बाद फोकस किया और वे स्वयं पूर्वोत्तर के कई दौरे कर चुके हैं, साथ ही उन्होंने अपने मंत्रियों को भी निर्देशित किया है कि वे पूर्वोत्तर के राज्यों में जाकर अपने मंत्रालयों के कार्यों की समीक्षा करें, वहां और क्या किया जा सकता है, इस दृष्टि से ध्यान दें, पूर्वोत्तर का क्षेत्र हमारा महत्वपूर्ण भू-भाग है। इस क्षेत्र के लोगों के जीवन स्तर में बदलाव आए और यह क्षेत्र कृषि व जैविक खेती की दृष्टि से भी बड़े हब के रूप में जाना जाए, जिसकी काफी गुंजाइश है, इस उद्देश्य को लेकर भी हम लोगों को काम करने की आवश्यकता है। भारत सरकार पूर्वोत्तर क्षेत्र को हरसंभव मदद दे रही है।

श्री तोमर ने कहा कि आयल पाम मिशन द्वारा पूर्वोत्तर क्षेत्र के किसानों व उद्यमियों के लिए विशेष रियायतें दी गई है, जिससे किसानों को किसी भी प्रकार से घाटा नहीं उठाना पड़ेगा और उन्हें उनकी फसल का वाजिब दाम मिलेगा। मिशन को लेकर गुवाहाटी में कांफ्रेंस भी की गई थी, जिसमें एमओयू हुए हैं और इनकी कार्यवाही चल रही है। ये मिशन पूर्वोत्तर की तस्वीर बदलने में मील का पत्थर साबित होगा। श्री तोमर ने कहा कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जी ने आणंद से इसके लिए जागरूकता अभियान शुरू किया है। सरकार भी उप योजना के माध्यम से काम कर रही है, इसे और परिमार्जित करते हुए सक्षम बनाया जाएगा। प्राकृतिक खेती पुरातन माडल ही है, जिससे देशी गायों की नस्लों को हम बचा सकेंगे, गाय का दूध उपयोगी है ही, गोबर आदि के उपयोग से खाद बनाकर खेती की लागत भी घटाई जा सकेगी तथा निर्यात में भी किसानों को अच्छे दाम मिलेंगे।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री कैलाश चौधरी ने कहा कि देश में कृषि अनुसंधान निरंतर आगे बढ़ रहा है। ड्रोन, किसान रेल, ई-नाम आदि के माध्यम से किसानों को लाभ मिल रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा प्रारंभ की गई दस हजार एफपीओ बनाने की स्कीम से किसान उत्साह के साथ जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आयल पाम मिशन के माध्यम से भी पूर्वोत्तर क्षेत्र में विकास की काफी संभावनाएं है।

गुवाहाटी की सांसद श्रीमती क्वीन ओजा तथा डेयर के सचिव एवं आईसीएआर के महानिदेशक डा. त्रिलोचन महापात्र ने भी संबोधित किया। आईसीएआर के उप महानिदेशक (कृषि प्रसार) डा.अशोक कुमार सिंह ने स्वागत भाषण दिया। संचालन डा. चहल ने किया। अटारी, गुवाहाटी के निदेशक डा. ए.के. त्रिपाठी ने आभार माना। कार्यक्रम में आईसीएआर के वरिष्ठ अधिकारी अधिकारी-वैज्ञानिक, कुलपतिगण व किसानबंधु उपस्थित थे।

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