Site icon Samagra Bharat News website

कृषि कर्ज में 10.4 फीसदी की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई: मुख्य आर्थिक सलाहकार

Finance Minister Nirmala Sitharaman presented the Economic Survey today, a day before the budget. Chief Economic Adviser after the

समग्र समाचार सेवा

नई दिल्ली, 31 जनवरी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट से एक दिन पहले आज इकोनॉमिक सर्वे पेश किया। इकोनॉमिक सर्वे पेश होने के बाद मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) डॉ. वी अनंत नागेश्वरन मीडिया से बात कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि वर्ष 2021-22 में भारत के विदेशी व्यापार में मजबूती से सुधार हुआ है। भारत 2021-22 के लिए निर्धारित 400 बिलियन अमेरिकी डॉलर के महत्वाकांक्षी वस्तु निर्यात लक्ष्य को हासिल करने के मार्ग पर बेहतर तरह से अग्रसर रहा। इसके अलावा व्‍यक्तिगत ऋण में 11.6% के दोहरे अंक की वृद्धि दर्ज की गई।

कृषि क्षेत्र अब पूर्व-महामारी के स्तर से 8 फीसदी कम

कृषि क्षेत्र अब पूर्व-महामारी के स्तर से 8 फीसदी कम है। औद्योगिक क्षेत्र मजबूत हुआ है। सेवा क्षेत्र अभी महामारी पूर्व स्तर पर नहीं पहुंचा है। सरकारी खपत मजबूत रही है लेकिन निजी खपत अभी भी महामारी से पहले के स्तर से पीछे है। निर्यात प्रमुख विकास चालक रहा है, आयात बहुत मजबूत है। GDP महामारी पूर्व स्तर से 1.3% अधिक है।

5.5 करोड़ से अधिक घरों को नल जल आपूर्ति उपलब्‍ध कराई गई

2015-16 से 2020-21 तक खाद्य तेल उत्‍पादन लगभग 43 प्रतिशत बढ़ा, सरकार ने 2021-22 में राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राज्‍यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों को 1052 लाख टन खाद्यान्‍न आवंटित किया। 2019 में जल जीवन मिशन के आरंभ होने के बाद से 5.5 करोड़ से अधिक घरों को नल जल आपूर्ति उपलब्‍ध कराई गई, देश के 83 जिलों ने ‘100 प्रतिशत नल जल आपूर्ति‍ वाले घरों’ की स्थिति हासिल की है। महामारी के दौरान सामाजिक सेवाओं पर सरकारी व्यय में महत्वपूर्ण वृद्धि, बजट अनुमान 2021-22 सरकार के सामाजिक सेवा क्षेत्र के आवंटन में 9.8 प्रतिशत की वृद्धि दिखाता है

2023 के लिए 8 से 8.5 फीसदी की विकास दर का अनुमान

इकोनॉमिक सर्वे में सरकार ने वित्तीय वर्ष 2023 के लिए 8 से 8.5 फीसदी की विकास दर का अनुमान लगाया है। आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था के 9.2 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। यह इस महीने की शुरुआत में जारी पहले अग्रिम अनुमानों के अनुरूप है। यह प्रोजेक्शन इस धारणा पर आधारित है कि आगे कोई महामारी नहीं होगी और आर्थिक व्यवधान नहीं होगा।

राज्य सरकारों का संयुक्त खर्च बढ़कर 71.61 लाख करोड़ रुपये हो गया

आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान सामाजिक सेवा क्षेत्र पर केंद्र और राज्य सरकारों का संयुक्त खर्च बढ़कर 71.61 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो वित्तीय वर्ष 2020-21 में हुए 65.24 लाख करोड़ रुपये (संशोधित अनुमान) खर्च से 9.8 प्रतिशत अधिक है। 31 मार्च 2022 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष के लिए सर्वेक्षण में कहा गया, “सामाजिक सेवाओं में शिक्षा, खेल, कला और संस्कृति, चिकित्सा और सार्वजनिक स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, जल आपूर्ति और स्वच्छता, आवास, शहरी विकास, एससी, एसटी और ओबीसी का कल्याण, लेबर और लेबर कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और कल्याण, पोषण, प्राकृतिक आपदाओं आदि से राहत शामिल हैं।”

Exit mobile version