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संसदः सरकार के पास गंगा में फेंकी गई लाशों का आंकड़ा नहीं

The government said in the Rajya Sabha on Monday that no information is available about the number of bodies floating in the Ganges

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 7 फरवरी। सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में कहा कि दूसरी कोविड लहर के चरम के दौरान गंगा में तैरते हुए शवों की संख्या के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। जूनियर जल शक्ति मंत्री बिश्वेश्वर टुडू ने सोमवार को राज्य सभा में कहा, “गंगा नदी में फेंके गए अनुमानित कोविड-19 से संबंधित शवों की संख्या के बारे में जानकारी उपलब्ध नहीं है।”

तृणमूल कांग्रेस सासंद के सवाल पर मिला जवाब

मोदी सरकार के ये कबूलमाना तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन के एक सवाल के जवाब में आया। उन्होंने कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार शवों को निपटाने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में भी जानकारी मांगी थी। सवालों के जवाब में मंत्री ने कहा कि “लावारिस/अज्ञात, जले हुए/आंशिक रूप से जले हुए शव” नदी या उसके किनारे पाए गए थे, और ये घटनाएं उत्तर प्रदेश और बिहार के जिलों से सामने आई थीं।”

राज्य सरकारों से केंद्र ने मांगी थी रिपोर्ट

उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रालय ने (स्वच्छ गंगा के लिए राष्ट्रीय मिशन के माध्यम से) संबंधित राज्य सरकारों से शवों और निपटान सहित की गई कार्रवाई पर एक रिपोर्ट मांगी थी। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उत्तराखंड, झारखंड और बंगाल के मुख्य सचिवों को भी एडवाइजरी जारी की गई। कांग्रेस ने सरकार की इस प्रतिक्रिया पर कड़ा हमला बोलते हुए, वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा कि वर्तमान उत्तर ऑक्सीजन की कमी के कारण होने वाली मौतों के बारे में पूछे गए प्रश्नों के समान था।

मई-जून में गंगा में फेंक दी गई थी लाशें

ज्ञात हो कि पिछले साल मई-जून में पवित्र गंगा में तैरते हुए शवों की भयावह तस्वीरें सामने आईं थीं। माना जाता है कि ये शव कोरोना के मरे लोगों के थे। इन भयावह तस्वीरों ने भारत और यहां तक कि दुनिया भर में सुर्खियां बटोरीं थीं। सुप्रीम कोर्ट ने इसे “गंभीर समस्या” कहा था और संबंधित सरकारों को फटकार भी लगाई थी। दूसरी लहर के चरम पर, जब आधिकारिक तौर पर रोजाना 3,000 से 4,000 कोविड से संबंधित मौतें होती थीं तो बिहार और यूपी में गंगा के किनारे सैकड़ों शव तैरते दिखे थे।

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