समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 29मार्च। राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविन्द ने आज (29 मार्च, 2022) नई दिल्ली में तीसरा राष्ट्रीय जल पुरस्कार प्रदान किया और जल शक्ति अभियान: कैच द रेन अभियान 2022 की शुरुआत की।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि जल प्रबंधन के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य के लिए राष्ट्रीय जल पुरस्कार प्रदान किया गया है और हमारे दैनिक जीवन व पृथ्वी पर जल के महत्व को रेखांकित करने के लिए जल अभियान का विस्तार करना सराहनीय है।

राष्ट्रपति ने आगे कहा कि शहर को पूरे साल जल देने वाले तालाब और झील जैसे जल स्रोत भी शहरीकरण के दबाव में लुप्त हो गए हैं। इसके चलते जल प्रबंधन अस्त-व्यस्त हो गया है। भूजल की मात्रा घट रही है और इसका स्तर भी नीचे जा रहा है। एक तरफ शहरों को सुदूर इलाकों से पानी लाना पड़ता है, तो दूसरी ओर मानसून में सड़कों पर जल भराव हो जाता है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक और कार्यकर्ता भी पिछले कुछ दशकों से जल प्रबंधन के इस विरोधाभास को लेकर अपनी चिंता व्यक्त करते रहे हैं। भारत में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है, क्योंकि हमारे देश में विश्व की आबादी का लगभग 18 फीसदी हिस्सा है, जबकि हमारे पास केवल 4 फीसदी शुद्ध जल संसाधन हैं। जल की उपलब्धता अनिश्चित है और यह काफी सीमा तक वर्षा पर निर्भर करती है।
राष्ट्रपति ने कहा कि आज जल संकट एक अंतर्राष्ट्रीय संकट बन गया है और यह भयानक रूप ले सकता है। कुछ रक्षा विशेषज्ञों ने तो यहां तक कह दिया है कि भविष्य में यह अंतर्राष्ट्रीय संघर्ष का एक प्रमुख कारण बन सकता है। हम लोगों को मानवता को ऐसी स्थितियों से बचाने के लिए सतर्क रहना होगा। उन्होंने इस पर प्रसन्नता व्यक्त की कि भारत सरकार इस दिशा में प्रभावी कदम उठा रही है।
राष्ट्रपति ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का सामना करना और अपनी पृथ्वी की रक्षा करना हम सभी के सामने एक प्रमुख चुनौती है। इस चुनौती से निपटने के लिए भारत सरकार ने एक नई दृष्टिकोण और विधि अपनाई है। 2014 में भारत सरकार ने पर्यावरण और वन मंत्रालय का नाम बदलकर व उसमें ‘जलवायु परिवर्तन’ को शामिल करके परिवर्तन का एक शुरुआती संकेत दिया था। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए साल 2019 में दो मंत्रालयों का विलय करके जल के मुद्दे पर एकीकृत व समग्र तरीके से काम करने और इसे सर्वोच्च प्राथमिकता देने के लिए जल शक्ति मंत्रालय का गठन किया गया था।
राष्ट्रपति ने इस पर प्रसन्नता व्यक्त की कि भारत ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और जल के कुशल उपयोग, जल स्रोतों के संरक्षण, प्रदूषण को कम करने तथा स्वच्छता की सुनिश्चितता के माध्यम से जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं। उन्होंने ने कहा कि हालिया वर्षों में सरकार की नीतियों में नदियों के संरक्षण, नदी घाटियों का समग्र प्रबंधन, जल सुरक्षा को स्थायी रूप से मजबूत करने के लिए लंबे समय से लंबित सिंचाई परियोजनाओं को तेजी से पूरा करना और मौजूदा बांधों का संरक्षण शामिल है।
राष्ट्रपति ने कहा कि सभी के लिए जल उपलब्ध करवाने और जल आंदोलन को जन आंदोलन बनाने के लिए भारत सरकार ने 2019 में ‘जल शक्ति अभियान’ शुरू किया था। साथ ही, उसी साल ‘जल जीवन मिशन’ भी शुरू किया गया था। पिछले साल 22 मार्च को ‘विश्व जल दिवस’ पर प्रधानमंत्री ने ‘जल शक्ति अभियान: कैच द रेन’ अभियान को शुरू किया था, जिसे मानसून से पहले और मानसून अवधि के दौरान देश के ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों के सभी जिलों में संचालित किया गया था। उन्होंने कोरोना महामारी की चुनौतियों के बीच इस अभियान की सफलता में राज्य सरकारों के सराहनीय योगदान की सराहना की।
राष्ट्रीय जल पुरस्कार विजेताओं के अपने-अपने क्षेत्रों में जल प्रबंधन के लिए किए गए अनुकरणीय कार्यों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे उदाहरणों के आधार पर हमें जल-सुरक्षित भविष्य को प्राप्त करने की उम्मीद है। उन्होंने पुरस्कार से सम्मानित लोगों को बधाई दी और उनसे सभी के लिए अनुकरणीय तथा प्रेरणा के स्रोत बने रहने का अनुरोध किया। राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि ये पुरस्कार भारत के लोगों के मस्तिष्क में जल चेतना का संचार करेंगे और व्यवहार में बदलाव लाने में सहायता करेंगे।