समग्र समाचार सेवा
चंडीगढ़, 31जुलाई। केंन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को चंडीगढ़ में ‘नशीली दवाओं की तस्करी और राष्ट्रीय सुरक्षा’ पर राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया। कार्यक्रम में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री, पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल, पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्री, केन्द्रीय गृह सचिव, निदेशक, NCB सहित BSF, NIA व NCB के अधिकारियों के साथ ही राज्यों के ANTF प्रमुख और NCORD सदस्य भी उपस्थित थे।
इस अवसर पर केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि ड्रग्स की तस्करी और प्रसार किसी भी समाज के लिए बहुत घातक होता है। ड्रग्स तस्करी के बाद जब उसका प्रसार समाज में होता है तो वो पीढ़ियों को खोखला कर देता है और दीमक की तरह देश और समाज की जड़ों को खोखला करने का काम करता है। कोई भी स्वस्थ, समृद्ध, सक्षम और सुरक्षित राष्ट्र ड्रग्स तस्करी के ख़िलाफ़ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाए बिना अपने उद्देश्य सिद्ध नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि ड्रग्स के ख़िलाफ़ लड़ाई सामाजिक रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण है। ये देश के अर्थतंत्र को खोखला बनाने का प्रयास कर रहे हैं, देश की सुरक्षा की दृष्टि से भी यह बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि ड्रग्स के कारोबार से उत्पन्न डर्टी मनी देशविरोधी गतिविधियों में उपयोग में आती है। एक ओर ड्रग्स तस्करी और इसके प्रसार को रोककर हम आने वाली पीढ़ियों को बर्बादी से बचाना चाहते हैं, इसके साथ-साथ नशे के व्यापार से जो डर्टी मनी जेनरेट होती है, उसे देश के ख़िलाफ़ उपयोग किया जाता है, उसे रोकना भी हमारे देश की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि ड्रग्स के ख़िलाफ़ लड़ाई में गृह मंत्रालय बहुआयामी अप्रोच के साथ आगे बढ़ा है। इसके लिए कई एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स किए गए हैं, नई पद्धतियां भी विकसित की हैं और राज्यों को इसके साथ जोड़ने के लिए प्रो-एक्टिव अप्रोच लिया है। एक ओर, फॉरेंसिक साइंस के क्षेत्र में अत्याधुनिक लैब उपलब्ध हो, इसके लिए नेश्नल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी कैंपस में एक सेंटर स्थापित किया है। दूसरी ओर, कानून को कठोर बनाने के लिए सबके साथ चर्चाएं भी चल रही हैं। तीसरी ओर, एन्कोर्ड के माध्यम से ज़िले तक किसी भी प्रकार की कहीं भी लूपहोल ना रहे, ऐसा एक समन्वय तंत्र बनाने का काम भी गृह मंत्रालय ने 2019 से किया है। इन सब समन्वित प्रयासों के जो परिणाम मिले हैं, वो हौंसला बढ़ाने वाले हैं। ये परिणाम दर्शाते हैं कि ये ऐसी समस्या नहीं है जिसका निदान नहीं है और जिसे मूल समेत समाप्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि अगर एन्कोर्ड ज़िला और तहसील तक पहुंच गया और सभी विभागों ने साथ मिलकर काम कर लिया, तो कुछ ही सालों में मोदी जी के नशामुक्त भारत का स्वप्न चरितार्थ होता हुआ दिखेगा।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आज के इस सेमिनार का विषय बहुत गंभीर है। इस विषय को लेकर भारत सरकार की गंभीरता को हम राज्य से ज़िला, ज़िला से तहसील और तहसील से ग्राम पंचायत तक परकोलेट करना चाहते हैं, इसीलिए इस सेमिनार को पांच राज्यों का सेमिनार बनाया है। उन्होंने कहा कि देश के दो क्षेत्र ऐसे हैं – नॉर्थ-ईस्ट और उत्तरी भाग – जहां की सरहदों से ड्रग्स आता है। लेकिन हम आंखें मूंद कर नहीं बैठ सकते क्योंकि हर समस्या का समाधान होता है और उसे खोजने की ज़रूरत होती है। इस लड़ाई में राज्यों को साथ लाना और एक सिनर्जी के साथ लड़ाई को लड़ना बहुत महत्वपूर्ण है। नारकोटिक्स के क्षेत्र में काम कर रही सभी ऐजेंसियों के बीच प्लेटफॉर्म पर चर्चा हो और सभी के प्रयास एक-दूसरे के पूरक हों, तो परिणाम ज़्यादा मिलेंगे। इस सेमिनार के विचार मंथन से जो अमृत निकलेगा उससे हम आने वाली पीढ़ियों को बचा पाएंगे।
अमित शाह ने कहा कि नारकोटिक्स के ख़िलाफ लड़ाई में सरकार ने अपनी अप्रोच में बहुत बड़ा बदलाव किया है। एनसीबी ने बहुत प्रयास करके एक एसओपी डेवलप की है। अगर ज़्यादा मात्रा में नारकोटिक्स पकड़ा जाता है तो वो कहां तक जाना था, वहां तक इसकी जांच की जाती है। कोई अगर सेवन करने वाला अगर पकड़ा जाता है, तो ये पदार्थ देश की सरहदों में कहां से आया, वहां तक जांच करनी है। ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर की समग्र जांच वाली इस अप्रोच ने परिणाम लाने में बहुत मदद की है। केन्द्रीय गृह मंत्री के निर्देश पर 1 जून से 15 अगस्त तक 75 दिन के ड्रग्स नष्ट करने के अभियान की शुरुआत हुई और अब तक 1200 करोड़ रुपये मूल्य के 51000 किलोग्राम ड्रग्स नष्ट किए जा चुके हैं। आज केन्द्रीय गृह मंत्री द्वारा नष्ट किए गए लगभग 31000 किलोग्राम ड्रग्स का काला बाज़ार मूल्य क़रीब 800 करोड़ रुपये है। इस प्रकार आज तक क़रीब 2000 करोड़ रुपये की क़ीमत के 82000 किलोग्राम ड्रग्स नष्ट किए जा चुके हैं। 15 अगस्त को 75 दिन के अभियान की समाप्ति पर इसकी मात्रा एक लाख किलोग्राम पहुँच जाएगी जिसका अनुमानित काला बाज़ार मूल्य क़रीब 3000 करोड़ रुपये होगा।