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🌳लापरवाही की हानिकारक आदत🌳

अरविन्द भारद्वाज
“जागरूकता” का अभाव ही “असावधानी” या “लापरवाही” कहा जाता है । ऐसे स्वभाव के व्यक्ति में दो प्रकार के दोष और आ जाते हैं, वह है —

(१) आगे पीछे के कार्यक्रम की परवाह नहीं करना ।
(२) अपने उत्तरदायित्व का अनुभव नहीं करना ।
जहाँ पहुँच गये बस वहाँ की बातों में उलझ गये । फल यह होता है कि लापरवाह व्यक्तियों की आर्थिक स्थिति गिरने लगती है और धीरे-धीरे वे दरिद्र बन जाते हैं ।

👉 “लापरवाह” व्यक्तियों से अपने वचन का पालन नहीं हो सकता क्योंकि हर एक वचन को पूरा करने के लिए वह समय ध्यान रखना पड़ता है जबकि उसे पूरा करना है, साथ ही वह सामग्री भी जुटानी पड़ती है, जो वचन पूरा करने के लिए प्रस्तुत की जाने वाली है । लापरवाह व्यक्ति पहले तो सोचता रहता है कि अभी क्या जल्दी है बहुत समय पड़ा हुआ है, इस काम को तो बहुत जल्द पूरा कर देंगे, ऐसे ही टालते-टालते समय बीतता चला जाता है और जब वचन पूरा करने की अवधि बिलकुल पास आ जाती है तब उसके हाथ- पैर फूल जाते हैं कि अब यह कार्य कैसे पूरा हो । अंत में दाँत निपोर कर रह जाते हैं ।

👉 जिनमें जागरूकता नहीं उनकी सारी चीजें अस्त-व्यस्त रहती हैं । सारी चीजें इधर-उधर, अस्त-व्यस्त, कूड़े- कचरे की तरह जहाँ-तहाँ पड़ी रहती है । शरीर पर मैल, कपड़े बेढंगे, हजामत बढ़ी हुई, बटन टूटे, जूते-चप्पल की सिलाई उधड़ी हुई ।

👉 ऐसे लोग दूसरों के यहाँ अपनी चीजें पड़ी रहने देते हैं, अपने यहाँ किसी की चीज आ जाय तो लौटाते नहीं । कहने का तात्पर्य यह है कि ये बातें हैं तो बहुत छोटी लेकिन व्यक्तित्व के निर्माण में इनका बहुत बड़ा योगदान है । अंग्रेजी में एक कहावत है “Spark neglected burns tha house” इनसे बचें और व्यक्तित्व को निखारें

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