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राजनाथ सिंह ने बताया नौ महीने में तीन बार विदेश जानें का कारण

समग्र समाचार सेवा
गांधीनगर, 21अक्टूबर। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उन्हें मई 2020 में भारत-चीन सीमा गतिरोध शुरू होने के बाद नौ महीने में तीन बार विदेश जाना पड़ा था. राजनाथ ने हथियारों एवं गोला-बारूद के मामले में अन्य देशों पर निर्भरता कम करने के लिए देश में मजबूत रक्षा उद्योग बनाने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि भारत को योजना में विशिष्टता और प्रौद्योगिकी के अलावा स्वदेशी उपकरण की भी आवश्यकता है.

राजनाथ ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन के साथ तनाव के बीच जिन देशों की यात्रा की थी, उसमें रूस भी शामिल है, जो भारत को रक्षा कलपुर्जों का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है. रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की रक्षा तैयारी को पिछले कुछ वर्षों में प्रोत्साहन मिला है. उन्होंने कहा, ‘‘मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि पड़ोस के खतरों से निपटने की हमारी तैयारी पिछले कुछ वर्षों में मजबूत हुई है. हमारी प्रतिकूलताओं से निपटने के लिए हमें योजना में विशिष्टता और स्वदेशी उपकरण तथा प्रौद्योगिकी की आवश्यकता है.’’

राजनाथ गांधीनगर में चल रहे ‘डिफेंस एक्सपो’ में ‘आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया-सशस्त्र बलों के लिए रूपरेखा’ विषय पर आयोजित एक संगोष्ठि में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि नयी दिल्ली को ऐसी स्थितियों का सामना करना पड़ता है, जब अन्य देशों से सैन्य उपकरण खरीदने में बहुत ज्यादा वक्त लगता है. उन्होंने कहा, ‘‘मैंने इसका निजी अनुभव किया है. भारत-चीन गतिरोध (2020 में) के दौरान मुझे नौ महीने में तीन बार विदेश जाना पड़ा. ऐसी स्थिति में वे आयातित उपकरण न केवल अपनी विशिष्टता खो देते हैं, बल्कि अन्य के मुकाबले कम प्रभावी भी साबित होते हैं.’’ रक्षा मंत्री ने कहा कि घरेलू रक्षा उद्योग को संघर्ष की स्थिति पैदा होने पर हथियार, गोला-बारूद और कलपुर्जों की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए.

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