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15 नवंबर के बाद गैर मान्यता प्राप्त मदरसों पर गिरेगी गाज, यूपी सरकार को अंतिम रिपोर्ट का इंतजार

समग्र समाचार सेवा
लखनऊ, 8नवंबर। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार 15 नवंबर के बाद उन मदरसों के खिलाफ कोई एक्शन ले सकती है जो सर्वे में गैर मान्यता प्राप्त पाए गए हैं। सूत्रों की माने तो अब तक यूपी में लगभग 8 हजार मदरसे मिले हैं जो गैर मान्यता प्राप्त हैं। हालांकि इसमें यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन मदरसों में दारुल उलूम देवबंद के मदरसे भी शामिल हैं या नहीं। सरकार के निर्णय को लेकर दारुल उलूम पहले ही कह चुका है कि वह अपने मदरसों में धार्मिक प्रशिक्षण देना जारी रखेंगे। इस बीच यूपी के अल्पसंख्यक मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा है कि रिपोर्ट का इंतजार है। एक रिपोर्ट आने के बाद उसे सीएम योगी आदित्यनाथ को सौँपा जाएगा। अंतिम फैसला वही लेंगे।

दरसअल अभी यूपी के सभी जिलाधिकारियों की ओर से राज्य सरकार को रिपोर्ट नहीं भेजी गई है। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि रिपोर्ट का विस्तार से अध्ययन किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के परामर्श से अंतिम निर्णय लिया जाएगा। हमारा संकल्प यह सुनिश्चित करना है कि सभी जातियों और समुदायों के सभी बच्चों को ऐसी शिक्षा मिले जो उन्हें समय के साथ तालमेल बिठाने में मदद करे।’

दारुल उलूम देवबंद ने पहले ही साफ कर दिया है कि उसकी राज्य के मदरसा बोर्ड से संबद्धता लेने की कोई योजना नहीं है और वह इसके साथ दाखिला लेने वाले छात्रों को बड़े पैमाने पर धार्मिक शिक्षण प्रदान करना जारी रखेगा। जबकि दारुल उलूम 1866 में स्थापित किया गया था, लखनऊ स्थित इस्लामिक मदरसा, नदवतुल उलमा, की स्थापना 1898 में हुई थी। ये सोसाइटी एक्ट के तहत पंजीकृत हैं और दक्षिण एशिया में अरबी में शिक्षण प्रदान करने वाले कुछ इस्लामिक मदरसों में से एक माना जाता है।

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री धर्मपाल ने कहा कि एक धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक व्यवस्था में, सभी अपनी पसंद के धर्म को आगे बढ़ाने के लिए स्वतंत्र हैं। लेकिन केवल धार्मिक शिक्षा से यहां पढ़ने वाले छात्र डॉक्टर, इंजीनियर, नौकरशाह और प्रबंधक के रूप में सफल नहीं हो सकते। उन्हें हिंदी, अंग्रेजी, गणित और अन्य प्रासंगिक विषय भी सीखने चाहिए।’ दारुल उलूम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे शिक्षण पद्धति में किसी भी बदलाव की अनुमति नहीं देंगे और धर्मशास्त्र आधारित शिक्षण को जारी रखेंगे, इस मुद्दे पर सरकार की प्रतिक्रिया अभी भी स्पष्ट नहीं है।

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