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पीएम मोदी का उत्तराखण्ड से विशेष लगाव. जिसके दिल में दया पीड़ा होगी वही कविता लिख सकता है – सीएम धामी

समग्र समाचार सेवा
शिमला, 9नवम्बर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कविता को आत्मा की अभिव्यक्ति व दिल से निकली आवाज बताते हुए कहा कि जिसका दिल साफ होगा मन में दया होगी, पीड़ा होगी, वही कविता लिख सकता है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सायं आईआरडीटी सभागार में राज्य स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर भाषा विभाग द्वारा आयोजित सर्वभाषा कवि सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि कहा कि राज्य स्थापना के बाद पहली बार भाषा विभाग द्वारा सर्वभाषा कवि सम्मेलन का आयोजन सराहनीय पहल है। मुख्यमंत्री ने कवि सम्मेलन में पधारे कवियों को सम्मानित करते हुए कहा कि कवियों के बारे में कहावत है कि जहां न पहुंचे रवि वहां पहुंचे कवि।

यही नहीं साहित्य, संगीत एवं कला से विहीन व्यक्ति को पशु के समान माना गया है। हमारे कवि समाज के पथ प्रदर्शक होते हैं। मुख्यमंत्री ने राज्य आन्दोलनकारियों को नमन करते हुए सभी को राज्य स्थापना की भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि विविधता में एकता हमारी पहचान है।

इस अवसर पर भाषा मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि हमारा प्रदेश बहुभाषी, बहुधर्मी एवं बहु संस्कृतियों वाला प्रदेश है। राज्य की भाषा एवं संस्कृति को बढ़ावा देने के लिये भाषा विभाग द्वारा पहली बार यह पहल की है। इस आयोजन को भविष्य में और अधिक प्रभावी बनाये जाने की भी उन्होंने बात कही। उन्होंने मंचाशीन कवियों का आह्वान किया कि वे राज्य के प्रतिभावान युवा रचनाकारों को बेहतर प्लेटफार्म प्रदान करने में मददगार बनें ताकि उनकी भी पहचान देश व दुनिया में हो सके।

इस अवसर पर जिन कवियों ने अपनी कविताओं की प्रस्तुति दी उनमें बुद्धिनाथ मिश्र, अतुल शर्मा, अफजल मगलोरी, अम्बर खरबन्दा, प्रेम साहिल, श्रीमती नीता कुकरेती, श्रीमती बीना बेंजवाल, श्रीमती श्रुति वत्स, श्रीमती बसन्ती मठपाल, गिरीश सुन्दरियाल, दिनेश सुन्दरियाल प्रमुख रहे। निदेशक भाषा संस्थान श्रीमती स्वाति भदोरिया ने आभार व्यक्त किया।

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