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10 साल के भीख मांगने वाले बच्चे की खुली किस्मत, घर पहुंचते ही बन गया करोड़पति

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 19दिसंबर। परिवार से बिछड़ने के बाद बच्चे का भाग्य अचानक खुल जाता है। एक बच्चा रातों-रात करोड़पति और फिर करोड़पति बन जाता है। हिंदी फिल्मों में ऐसे नजारे आपने कई बार देखे होंगे लेकिन असल जिंदगी में कुछ ऐसा ही यूपी के सहारनपुर में एक बच्चे के साथ हुआ। कुछ दिनों पहले यह बच्ची गली-गली में भीख मांगकर अपना गुजारा कर रही थी। बच्ची के पिता की कोरोना से मौत हो गई और कुछ दिन बाद मां की भी मौत हो गई। यह बच्चा रोजी-रोटी के लिए सड़कों पर भीख मांगने लगा। एक दिन ऐसा हुआ कि बच्चा एक झटके में करोड़पति बन गया और उसकी किस्मत रातों-रात आसमान छू गई।

मामला सहारनपुर के पंडोली गांव का है। 10 साल के शाहजेब आलम की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। मोहम्मद नवीद का लंबी बीमारी के बाद साल 2019 में निधन हो गया था। उसके बाद उनकी पत्नी इमरान अपने बेटे शाहजेब को लेकर कलियर चली गईं। परिवार का पालन-पोषण करने के लिए छोटी-मोटी नौकरी करने लगा लेकिन शाहजेब की जिंदगी पर उस वक्त बड़ा पहाड़ टूट पड़ा जब साल 2021 में इमराना की कोरोना से मौत हो गई।

जब मासूम शाहजेब अनाथ हो गया, तो उसके पड़ोसियों ने उसे सूफी संप्रदाय के प्रतिष्ठित तीर्थ स्थल पिरान कलियर में शरण लेने की सलाह दी। तब से शाहजेब वहां अनाथ की तरह रहता है और भीख मांगता है। वह जीवित रहने के लिए पूरी तरह से लोगों के दान पर निर्भर हो गया। इस बीच शाहजेब के दादा मोहम्मद याकूब ने अपनी वसीयत लिखी जिसमें उन्होंने अपनी अचल संपत्ति का एक हिस्सा अपने दिवंगत बेटे नवीद के बेटे शाहजेब के नाम कर दिया। इस प्रॉपर्टी की कीमत 2 करोड़ रुपए बताई जा रही है।

2021 में जब याकूब की मौत हुई तो वसीयत लागू हो गई और 5 बीघा जमीन वाले दो मंजिला मकान की संपत्ति शाहजेब को ट्रांसफर कर दी गई. लेकिन शाहजेब का कहीं पता नहीं चला। शाहजेब के परिजनों ने जब उसे इधर-उधर तलाशना शुरू किया तो वह कलियर में भीख मांगता मिला। अब परिजन उसे अपने साथ पंडोली गांव ले आए हैं।

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