समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 31दिसंबर। विदेश मंत्री डॉक्टर एस.जयशंकर ने कहा है कि भारत को मजबूत अर्थव्यवस्था वाले स्वतंत्र विचारधारा वाले देश के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा है कि विश्व समुदाय को भारत से बड़ी आशाएं हैं जो समस्याओं का समाधान कर सकता है। श्री जयशंकर ने कहा कि वे कूटनीति और विदेश नीति में दृढ़ता बनाए रखने के पक्षधर हैं। उन्होंने कहा कि मूल मुद्दों पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। विदेश मंत्री ने कहा कि आतंकवाद के बूते भारत को बातचीत के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि भारत अपने पड़ोसियों से अच्छे संबंध चाहता है लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि आतंकवाद को उचित ठहराया जाए।
विदेश मंत्री ने स्वीकार किया कि चीन के साथ हमारे संबंध सामान्य नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा को एकतरफा तरीक़े से बदलने की किसी भी कोशिश को भारत स्वीकार नहीं करेगा। डॉ. जयशंकर ने कहा कि देश की सीमा पर चुनौतियां बनीं हुई हैं और कोविड काल में ये चुनौतियां और बढ़ी हैं।
विदेश मंत्री ने कहा कि भारतवंशी मातृभूमि के लिए शक्ति का स्रोत हैं और भारतवंशियों को लेकर मोदी सरकार की दृष्टि एकदम स्पष्ट रही है। उन्होंने कहा कि उनके हितों का ख़याल रखना सरकार का कर्तव्य है–खासकर तब, जब वे संकट में हों।
डॉ. जयशंकर 3 जनवरी तक साइप्रस की यात्रा पर हैं।

