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ज़िन्दगी का खुमार बाक़ी है…

कपिल कुमार
कपिल कुमार

 

 

 

 

 

 

 

ज़िन्दगी का खुमार बाक़ी है…

ये दिले बेकरार बाक़ी है
ज़िन्दगी का खुमार बाक़ी है

वक्त ने ख़्वाब सारे तोड़ दिए
डूबी कश्ती , सवार बाक़ी है

में भी हारा नहीं हूँ ज़ख्मी हूँ
जंग भी आर – पार बाक़ी है

सारे दरबार खटखटा आए
सिर्फ़ तेरा दयार बाक़ी है

ज़ुल्म तुमने बहुत किए लेकिन
अब भी ये जां निसार बाक़ी है
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कपिल कुमार
बेल्जियम

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