Site icon Samagra Bharat News website

चैत्र नवरात्रि 2023 सातवां दिन : नवरात्रि के सातवें दिन करें मां कालरात्रि का पूजन, जानें ​पूजा विधि, आरती और मंत्र

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 28 मार्च। आज यानि 28 मार्च को चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है और इस सप्तमी नवरात्रि का व्रत रखा जाएगा. सप्तमी नवरात्रि मां दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप को समर्पित है और इस दिन मां कालरात्रि का पूजन किया जाता है. कहते हैं विधि-विधान के साथ मां कालरात्रि की पूजा करने से जीवन में आ रही सभी नकारात्मक ऊर्जाओं समाप्त हो जाती हैं. उनकी पूजा करते समय कथा, आरती और मंत्र जरूर पढ़ने चाहिए. इससे माता रानी प्रसन्न होती हैं और जातकों को अपना आशीर्वाद देती हैं.

मां कालरात्रि कथा
मां कालरात्रि देवी दुर्गा के 9 स्वरूपों में से एक हैं, मां कालरात्रि का रंग कृष्ण वर्ण का है, काले रंग के कारण उनको कालरात्रि कहा गया है. चार भुजाओं वाली मां कालरात्रि दोनों बाएं हाथों में क्रमश: कटार और लोहे का कांटा धारण करती हैं. मां दुर्गा ने असुरों के राजा रक्तबीज का संहार करने के लिए अपने तेज से मां कालरात्रि को उत्पन्न किया था.

मां कालरात्रि पूजन विधि
नवरात्रि के सातवें दिन स्नान आदि से निवृत्त होकर मां कालरात्रि का स्मरण करें, फिर माता को अक्षत्, धूप, गंध, पुष्प और गुड़ का नैवेद्य श्रद्धापूर्वक चढ़ाएं. मां कालरात्रि का प्रिय पुष्प रातरानी है, यह फूल उनको जरूर अर्पित करें. इसके बाद मां कालरात्रि के मंत्रों का जाप करें तथा अंत में मां कालरात्रि की आरती करें.

मां कालरात्रि के मंत्र
‘ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ऊं कालरात्रि दैव्ये नम:.’

मंत्र-
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता.
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा.
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

मां कालरात्रि की आरती
कालरात्रि जय-जय-महाकाली।
काल के मुह से बचाने वाली॥

दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा।
महाचंडी तेरा अवतार॥

पृथ्वी और आकाश पे सारा।
महाकाली है तेरा पसारा॥

खडग खप्पर रखने वाली।
दुष्टों का लहू चखने वाली॥

कलकत्ता स्थान तुम्हारा।
सब जगह देखूं तेरा नजारा॥

सभी देवता सब नर-नारी।
गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥

रक्तदंता और अन्नपूर्णा।
कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥

ना कोई चिंता रहे बीमारी।
ना कोई गम ना संकट भारी॥

उस पर कभी कष्ट ना आवें।
महाकाली माँ जिसे बचाबे॥

तू भी भक्त प्रेम से कह।
कालरात्रि माँ तेरी जय॥

Exit mobile version