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सरकार ने हमारे जीवन में पैदा होने वाले कचरे से संपत्ति बनाने की पहल की है- नितिन गडकरी

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 26मई। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री  नितिन गडकरी ने आग्रह किया है कि वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए किफायती ईंधन की खोज और उपयोग करना अनिवार्य है, जो आर्थिक रूप से व्यवहार्य भी है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री ने आज मुंबई में ‘ग्रीन हाइड्रोजन कॉन्क्लेव’ का उद्घाटन किया।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि बायो-सीएनजी और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे वैकल्पिक ईंधन न केवल प्रदूषण को कम करने में मदद करते हैं, बल्कि ईंधन की लागत में भी काफी बचत करते हैं। उन्होंने बताया कि हरित हाइड्रोजन के लिए भारत की क्षमता 5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है। उन्होंने कहा कि यह सभी हितधारकों की जिम्मेदारी है कि वे लोगों को सस्ती दरों पर ये ईंधन उपलब्ध कराएं और इन ईंधनों के उपयोग की आवश्यकता के बारे में आम नागरिकों में जागरूकता पैदा करें। उन्होंने कहा कि अगर इसकी लागत अधिक है तो ग्रीन हाइड्रोजन उपयोगी नहीं होगा और हितधारकों से दरों को कम रखने पर ध्यान देने का आग्रह किया। इस संबंध में उन्होंने कहा कि सरकार ने हमारे जीवन में पैदा होने वाले कचरे से संपत्ति बनाने की पहल की है।

नितिन गडकरी ने कहा कि देश अब दो बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिनमें से एक लाखों करोड़ रुपये के जीवाश्म ईंधन के आयात से संबंधित है, जो देश के लिए एक बड़ी आर्थिक चुनौती है। दूसरी चुनौती प्रदूषण पर लगाम लगाने से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि हम विशेष रूप से मेट्रो शहरों में वायु प्रदूषण की बहुत गंभीर समस्या का सामना कर रहे हैं। उन्होंने दोहराते हुए कहा कि ये चिंता के विषय हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में ही नहीं, दुनिया में हर जगह लोग डीकार्बोनाइजेशन के बारे में बात कर रहे हैं, जो कि जलवायु परिवर्तन के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

केंद्रीय मंत्री  नितिन गडकरी ने कहा कि किफायती, प्रदूषण मुक्त और पर्यावरण के अनुकूल स्वदेशी का अधिक से अधिक उत्पाद होने पर, जो आयात का विकल्प प्रदान करते हैं और देश में सभी प्रकार के प्रदूषण को कम करते हैं, आत्मनिर्भर भारत और पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का सपना जल्द से जल्द साकार होगा। उन्होंने कहा, “हमारा सपना भारत को ऊर्जा का निर्यातक बनाना है।”

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री ने यह भी कहा कि जहां हम थर्मल पावर, हाइड्रो पावर और पवन ऊर्जा पर बहुत तेजी से काम कर रहे हैं, वहीं हमें परमाणु ऊर्जा पर भी ध्यान देना होगा, जो शून्य-उत्सर्जन स्वच्छ ऊर्जा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि कृषि और ऊर्जा क्षेत्र समय की मांग हैं। केंद्रीय मंत्री ने यह भी आग्रह किया कि कृषि को प्रमाणित प्रौद्योगिकी और बिजली क्षेत्र से जोड़कर कई रोजगार सृजित किए जा सकते हैं।

इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में महाराष्ट्र आर्थिक विकास परिषद के अध्यक्ष श्री रवींद्र बोराटकर, ग्रीन पॉलीटिशियन के श्री एरिक सोलहेम, मुंबई में रॉयल नॉर्वेजियन महावाणिज्य दूतावास के महावाणिज्यदूत आरने जान फलोलो, जर्मनी के महावाणिज्यदूतअचिम फैबिग, जापान के महावाणिज्य दूत डॉ. यासुकता फुकहारी, जीएच2 कॉन्क्लेव के आयोजन के अध्यक्ष  मनीष पांचाल और जीएच2 कॉन्क्लेव के नॉलेज चेयर शार्दुल कुलकर्णी शामिल थे। केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने इस आयोजन का समर्थन किया।

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