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राजनीति में विरोध की भी एक सीमा होना चाहिए, नए संसद के उद्घाटन के विवाद पर बोले एस.जयशंकर

समग्र समाचार सेवा
सूरत, 26मई।गुजरात में दो दिवसीय दौरे पहुंचे केंद्रीय विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि नए संसद के उद्घाटन कार्यक्रम में कुछ लोग विवाद पैदा करने की कोशिश कर रह है, लेकिन मेरा मानना ​​है कि राजनीति में लिप्त होने की एक सीमा होनी चाहिए. कम से कम ऐसे मौकों पर पूरे देश को एक साथ आना चाहिए. नए संसद भवन के उद्घाटन को लोकतंत्र के त्योहार के रूप में लिया जाना चाहिए और इसे उसी भावना से मनाया जाना चाहिए.

एक दर्जन से अधिक दलों ने नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह का बहिष्कार किया है. जिसके चलते बीजेपी और विपक्षी दलों में वाकयुद्ध छिड़ गया है. विपक्षी दलों का कहना है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों नई संसद के उद्घाटन का करना चाहिए न कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से.वहीं विपक्ष पर पलटवार करते हुए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने कहा कि विपक्षी दलों को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए. उन्हें ये नहीं भूलना चाहिए भारत के लोग हमारे लोकतंत्र और उनके चुने हुए प्रतिनिधियों के अपमान को नहीं भूलेंगे.

सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका (PIL) पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें निर्देश दिया गया था कि उद्घाटन राष्ट्रपति द्वारा किया जाना चाहिए. जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता जया सुकिन से कहा कि अदालत समझती है कि यह याचिका क्यों और कैसे दायर की गई, हालांकि, “संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत इस याचिका पर विचार करने की इच्छा नहीं है.

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