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भारतीय वायुसेना के राफेल लड़ाकू विमानों को ‘मेक इन इंडिया’ मिसाइलों से किया जाएगा लैस! देसी हथियारों को मिलेगा बड़ा फायदा

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 26जुलाई। भारतीय वायुसेना के राफेल लड़ाकू विमानों को मेक इन इंडिया हथियारों से लैस किया जा सकता है। दरअसल भारतीय वायुसेना ने इस संबंध में राफेल बनाने वाली फांसिसी कंपनी दसो एविएशन से बात की है। दसो एविएशन यदि भारतीय वायुसेना की मांग को मान लेती है तो मेक इन इंडिया के लिहाज से यह गेमचेंजर साबित हो सकता है। इससे भारतीय हथियारों के लिए वैश्विक बाजार खुल सकता है।

डीआरडीओ द्वारा विकसित हथियारों से किया जाएगा लैस
बता दें कि दुनिया के कई देशों द्वारा राफेल लड़ाकू विमान इस्तेमाल किए जाते हैं। इनमें भारत, फ्रांस, मिस्त्र, कतर आदि शामिल हैं। साथ ही ग्रीस, क्रोएशिया, यूएई और इंडोनेशिया भी राफेल लड़ाकू विमानों के लिए ऑर्डर दे चुके हैं। रक्षा अधिकारियों का कहना है कि भारतीय वायुसेना ने दसो एविएशन से मांग की है कि भारत में डीआरडीओ द्वारा विकसित स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपन और हवा से हवा में मार करने वाली अस्त्र मिसाइल से राफेल को एकीकृत किया जाए। ये मिसाइलें भारतीय वायुसेना 2020 से इस्तेमाल कर रही है।

सुखोई और तेजस में भी लगे भारतीय हथियार
गौरतलब है कि डीआरडीओ द्वारा विकसित इन हथियारों के अलावा भारत की निजी कंपनियों द्वारा विकसित हथियारों को भी राफेल के साथ एकीकृत करने की वायुसेना की योजना है। रूस में निर्मित सुखोई 30एमकेआई विमानों में पहले से भी भारत में विकसित हथियार लगाए गए हैं। साथ ही एलसीए तेजस विमानों में भी मेक इन इंडिया के तहत बने हथियार लगाए गए हैं।

सेना को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम
भारतीय वायुसेना के पास 36 लड़ाकू विमान हैं और साथ ही भारतीय नौसेना के लिए भी 26 लड़ाकू विमानों का ऑर्डर दे दिया गया है। भारतीय सेना को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह बड़ा कदम साबित हो सकता है। हवा से हवा में मार करने वाली जिस अस्त्र मिसाइल को राफेल के साथ एकीकृत करने की मांग की जा रही है, वह 100 किलोमीटर की दूरी तक मार करने की क्षमता रखती है और इसका एडवांस वर्जन 160 किलोमीटर तक मार कर सकता है। इस मिसाइल को 300 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम बनाया जा रहा है।

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