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2021 के अध्ययन में दक्षिण ल्होनक झील के फटने को लेकर किया गया था आगाह, 2013 में भी मची थी ऐसी तबाही

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 7अक्टूबर। उत्तरी सिक्किम में ल्होनक झील पर बादल फटने से बुधवार को तीस्ता नदी बेसिन में अचानक बाढ़ आ गई। सिक्किम में बुधवार तड़के आई बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढती जा रही है। वहीं इस बाढ़ में अबतक 100 से ज्यादा लोग लापता चल रहे हैं और 26 अन्य घायल बताए जा रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय शोध दल ने एक अध्ययन में दो साल पहले आगाह किया था कि भविष्य में सिक्किम में दक्षिण ल्होनक झील फट सकती है और इससे झील के निचले क्षेत्र काफी प्रभावित हो सकते हैं। इस घटना से चुंगथंग बांध भी टूट गया जो सिक्किम में सबसे बड़ी ताप विद्युत परियोजना है।

साल 2021 में हुआ अध्ययन जर्नल ‘ज्योमोर्फोलॉजी’ में प्रकाशित हुआ था। इसमें रेखांकित किया गया था कि दक्षिण ल्होनक झील का स्तर हिमनद के पिघलने की वजह से बीते एक दशक में खासा बढ़ा है और हिमनद झील के फटने से बाढ़ (जीएलओएफ) का खतरा बढ़ गया है।

हिमनद झील के फटने से बाढ़ तब आती है जब हिमनद के पिघलने से बनी झील में अचानक से बाढ़ आ जाए। यह कई कारणों से होता है जैसे झील में बहुत सारा पानी जमा हो जाए।

अध्ययन बताता है कि 1962 से 2008 के बीच 46 साल में हिमनद करीब दो किलोमीटर पीछे हट गए हैं और यह 2008 से 2019 के बीच तकरीबन 400 मीटर और पीछे चले गए हैं। सिक्किम हिमालय में तीस्ता बेसिन में ऊंचाई वाले हिमनंद क्षेत्र से निकलने वाली कई हिमनद झीलें हैं, जिनमें सबसे बड़ी और तेज़ी से बढ़ती झील दक्षिण ल्होनक झील है।

अध्ययन के लेखकों ने कहा कि इसलिए, वर्तमान और भविष्य में हिमनंद टूटने से होने वाले परिवर्तनों से जुड़े जीएलओएफ खतरे का मूल्यांकन करना अत्यधिक महत्वपूर्ण है। अध्ययन में अन्य शोधकर्ता अमेरिका के डेटन विश्वविद्यालय, ऑस्ट्रिया के ग्राज़ विश्वविद्यालय और स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख विश्वविद्यालय से थे।

अपने अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने भविष्य में झील के आकार और घाटी पर प्रभावों की गणना करने के लिए हिमनद और जलवायु मॉडलिंग को एकीकृत किया और दक्षिण ल्होनक झील के भविष्य के जीएलओएफ खतरे का आकलन किया।

साल 2013 में ग्लेशियर के निकट बर्फ का पहाड़ टूटने से आई थी भारी तबाही
आपको बता दें कि चोराबारी ग्लेशियर वही ग्लेशियर है, जिसने साल 2013 में केदारनाथ धाम में भारी तबाही मचाई थी. इस दौरान भी एवलॉन्च हुआ था. तब लोगों ने इसे मामूली घटना समझा था, जिसके बाद धीरे-धीरे वहां पर एक बड़ा पहाड़ नीचे आता दिखाई पड़ा, जिसके बाद लोगों को असल बात समझ में आई, तब तक तबाही का मंजर शुरू हो गया.

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